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नया खतरा: कोरोना निगेटिव हो चुके मरीजों के फेफड़े बदलने की आई नौबत, 11 मरीज हुए भर्ती

Fri, 20 Aug 2021 08:23 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 20 Aug 2021 08:23 PM IST
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chance to change lungs of patients who became corona negative in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके कुछ मरीजों के फेफड़े बदलने की नौबत आ गई है। ऐसे मरीजों में लंग्स फाइब्रोसिस की समस्या देखने को मिली है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11 मरीज ऐसे हैं, जो निगेटिव होने के बाद भी भर्ती हैं। इनमें तीन की स्थिति बेहद गंभीर है। इन्हें एसजीपीजीआई रेफर करने की तैयारी है।



जानकारी के मुताबिक, कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित हुए 90 प्रतिशत मरीजों के फेफड़ों पर खतरनाक असर पड़ा है। ऐसे कई मरीजों की मौत बीआरडी से लेकर निजी अस्पतालों में हो चुकी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना से ठीक हो चुके कई लोग फेफड़ों की समस्या लेकर ओपीडी में आ रहे हैं। विज्ञान की भाषा में इसे लंग्स फाइब्रोसिस कहते हैं। ऐसे मरीजों का इलाज बेहद महंगा है।

 

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला

शुरुआती इलाज में इकमो मशीन की जरूरत होती है, जिसका खर्च एक से डेढ़ लाख रुपये प्रतिदिन का है। यह मशीन मेडिकल कॉलेज में नहीं है। ऐसे मरीजों को बचाने का एक ही विकल्प है फेफड़ा प्रत्यारोपण। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि तीन मरीजों की स्थिति खराब हैं।

 

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

वह निगेटिव हो चुके हैं, लेकिन उनके फेफड़ों में ज्यादा समस्या है। बीआरडी में फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा नहीं है। न ही इकमो मशीन है। इसलिए तीनों मरीजों को रेफर किया जाएगा। इसके अलावा आठ मरीजों की स्थिति में पहले से काफी सुधार है।  


 

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डॉ. अश्वनी मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।

30 से अधिक मरीज किए जा चुके हैं रेफर
बीआरडी में लंग्स फाइब्रोसिस के 30 से अधिक मरीज रेफर किए जा चुके हैं। डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि लंग्स फाइब्रोसिस में फेफड़ों के अंदर मौजूद ऊतक यानी टिश्यू सूजने लगते हैं। इस वजह से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इससे खून का बहाव शरीर में कम होने लगता है। स्थिति गंभीर होने पर दिल ढंग से काम नहीं करता। नतीजा मल्टी ऑर्गन फेल्योर, हार्ट अटैक या गंभीर अवस्था में मौत हो जाती है।

 

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

प्रदेश में नहीं होता फेफड़े का प्रत्यारोपण
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि फेफड़े के प्रत्यारोपण में डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च आता है। देश में हैदराबाद और पीएमएस वेल्लोर में फेफड़ा प्रत्यारोपण होता है। ऐसे मरीजों को हर हाल में इकमो मशीर में रखना पड़ता है। प्रदेश में केवल एसजीपीजीआई में यह सुविधा उपलब्ध है।

 

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