भगवान बुद्ध की धरा भी अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान शासन और मानवता पर क्रूरतम प्रहार से आहत है। दो दशक पूर्व तालिबानियों ने जो जख्म दिया था, वह फिर से हरा हो गया है। तथागत की माटी के लोग भी इस दर्द को शिद्दत से महसूस कर रहे हैं।
तस्वीरें: बुद्ध की धरती को अब भी महसूस होता है तालिबानियों से मिला दर्द, जानिए क्या है इसकी कहानी
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तालिबानों के लिए करारा जवाब होगा
पूर्व प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि अफगानिस्तान में दोबारा तालिबानों की ओर से आतंक मचाया जा रहा है। बुद्ध भगवान सहित अन्य प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त की जा रही हैं। ऐसे में कपिलवस्तु में शिलान्याय हो चुके 180 फीट की प्रतिमा के निर्माण को मूर्त रूप देने से बौद्ध पर्यटकों के साथ ही भारतीयों के लिए गौरव की बात होगी, साथ ही तालिबानों को करारा जवाब भी होगा।
प्रतिमा निर्माण से ही जनभावनाओं का सम्मान
वरिष्ठ अधिवक्ता दिव्य प्रकाश शुक्ला ने कहा कि 2001 में तालिबानों की ओर से भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं तोड़ी गई थीं। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए 180 फीट प्रतिमा निर्माण के लिए शिलान्यास किया था। अफसोस यह है कि राजनेता सिर्फ अपनी भावनाओं का ख्याल रखकर तात्कालिक निर्णय तो ले लते हैं, पर जन भावनाओं को भूल जाते हैं।
घाव को भरने का माहौल बनाएगा प्रतिमा निर्माण
चिकित्सक डॉ. अरुण द्विवेदी ने कहा कि अफगानिस्तान में 2001 के बाद पुन: एक बार तालिबानी के आतंक से वहां के नागरिक आहत हैं ही, साथ ही बुद्ध की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना निश्चय ही बौद्ध देशों के साथ ही भारतीय भी दुखी हैं। ऐसे में कपिलवस्तु में शिलान्यास वाली जगह प्रतिमा का निर्माण हो जाए तो तालिबानियों से मिले दर्द पर थोड़ा मरहम होगा।
केंद्र व प्रदेश सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए
कपिलवस्तु सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीता यादव ने कहा कि एक बार फिर अफगानिस्तान में तालिबानों का हमला हो रहा है। अफगानिस्तान में भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं पुन: क्षतिग्रस्त की जा रही हैं। ऐसे में 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से किए गए 180 फीट की ऊंची प्रतिमा के निर्माण की प्रासंगिकता बढ़ जाती है। इस दिशा में केंद्र और प्रदेश सरकार को ठोस कदम उठाया जाना बेहतर होगा।