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Siddharthnagar News: कागजात अधूरे तो सड़क पर नहीं दौड़ा सकेंगे निजी एंबुलेंस
Tue, 06 Oct 2026 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:45 PM IST
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सिद्धार्थनगर। पुरानी और अनफिट वैन को एंबुलेंस का रूप देकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ और ढोने का खेल अब नहीं चलेगा। मानक विहीन और बिना पंजीकरण संचालित एंबुलेंस पर परिवहन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम कार्रवाई करेगी। शासन के निर्देश पर जिले में निजी एंबुलेंस की जांच का अभियान शुरू कर दिया गया है। जांच में फिटनेस, पंजीकरण, जरूरी कागजात और एंबुलेंस में उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं की पड़ताल की जा रही है।
संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार जिले में 95 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनका इस्तेमाल मरीजों को स्थानीय अस्पतालों के साथ गोरखपुर, बस्ती और लखनऊ समेत दूसरे शहरों के अस्पतालों तक पहुंचाने में किया जाता है। इसके अलावा कई निजी एंबुलेंस बिना स्पष्ट रिकॉर्ड के अलग-अलग स्थानों से संचालित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
जांच में कई बार ऐसे वाहन मिले हैं, जिनमें मरीजों को ले जाने के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं होतीं। अधिकतर में ऑक्सीजन सिलिंडर और स्ट्रेचर के अलावा जरूरी चिकित्सा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ तक नहीं होता। गंभीर मरीजों को लंबी दूरी तक ऐसे वाहनों से ले जाना जोखिम भरा हो सकता है। इसके बावजूद मरीजों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
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शासन ने बिना मानक एंबुलेंस के संचालन और मरीजों से होने वाली मनमानी पर रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब पंजीकृत एंबुलेंस के साथ सड़क पर संचालित अन्य निजी एंबुलेंस की भी जांच होगी। मानक, फिटनेस या दस्तावेजों में कमी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान दो वाहनों पर कार्रवाई किए जाने की भी जानकारी है।
मरीजों को दूसरी जगह पहुंचाने की शिकायत : निजी एंबुलेंस से मरीजों को बताए गए अस्पताल के बजाय दूसरे अस्पताल ले जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। करीब दो वर्ष पहले एक महिला को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने के बजाय शहर के ही एक निजी अस्पताल में पहुंचाने का आरोप लगा था। इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ने के बाद महिला की मौत हो गई थी। एंबुलेंस की पहचान नहीं होने से मामले में कार्रवाई मुश्किल हुई।
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संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार जिले में 95 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनका इस्तेमाल मरीजों को स्थानीय अस्पतालों के साथ गोरखपुर, बस्ती और लखनऊ समेत दूसरे शहरों के अस्पतालों तक पहुंचाने में किया जाता है। इसके अलावा कई निजी एंबुलेंस बिना स्पष्ट रिकॉर्ड के अलग-अलग स्थानों से संचालित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
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जांच में कई बार ऐसे वाहन मिले हैं, जिनमें मरीजों को ले जाने के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं होतीं। अधिकतर में ऑक्सीजन सिलिंडर और स्ट्रेचर के अलावा जरूरी चिकित्सा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ तक नहीं होता। गंभीर मरीजों को लंबी दूरी तक ऐसे वाहनों से ले जाना जोखिम भरा हो सकता है। इसके बावजूद मरीजों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
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शासन ने बिना मानक एंबुलेंस के संचालन और मरीजों से होने वाली मनमानी पर रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब पंजीकृत एंबुलेंस के साथ सड़क पर संचालित अन्य निजी एंबुलेंस की भी जांच होगी। मानक, फिटनेस या दस्तावेजों में कमी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान दो वाहनों पर कार्रवाई किए जाने की भी जानकारी है।
मरीजों को दूसरी जगह पहुंचाने की शिकायत : निजी एंबुलेंस से मरीजों को बताए गए अस्पताल के बजाय दूसरे अस्पताल ले जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। करीब दो वर्ष पहले एक महिला को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने के बजाय शहर के ही एक निजी अस्पताल में पहुंचाने का आरोप लगा था। इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ने के बाद महिला की मौत हो गई थी। एंबुलेंस की पहचान नहीं होने से मामले में कार्रवाई मुश्किल हुई।