Harishankar Tiwari: हरिशंकर तिवारी के पैतृक गांव पहुंची शव यात्रा, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
मंगलवार की देर शाम पंडित हरिशंकर तिवारी के निधन की सूचना चिल्लूपार क्षेत्र के लोगों को मिली तो लोग हाता के लिए निकल पड़े। बुधवार को गोरखपुर से निकली शवयात्रा में क्षेत्र के लोग भी हमसफर हो गए। कुछ देर गांव में रूकने के बाद शव यात्रा बड़हलगंज के लिए रवाना हुई। जैसे जैसे काफिला आगे चलता रहा लोगों का कारवां भी बढ़ता गया।
शोक में बंद रहे व्यवसायिक प्रतिष्ठान व शिक्षण संस्थाएं
पूर्व कैबिनेट पंडित हरिशंकर तिवारी के निधन पर बड़हलगंज में अधिकांश व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बैंक रोड व कालेज रोड की सभी दुकानें बंद रहीं। वहीं पं भुगृनाथ चतुर्वेदी कन्या इंटर कॉलेज छपिया, नेशनल इंटरमीडिएट कालेज, नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कालेज बडहलगंज के अलावा तमाम कान्वेंट स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया।
हरिशंकर तिवारी की ख्याति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिल्लूपार सीट से वे 22 साल तक लगातार विधायक चुने गए। हरिशंकर की एक खूबी ये भी रही कि हर दल के साथ उनके करीबी रिश्ते रहे। सत्ता चाहे जिसकी भी रही वे हमेशा मंत्री बनते रहे। बीजेपी का दौर हो या समाजवादी पार्टी अथवा बहुजन समाज पार्टी का, हर बार पंडित हरिशंकर को सराकर में बड़ा ओहदा मिला।
वर्ष 2007 तक हरिशंकर तिवारी का राजनीतिक जीवन ऊंचाइयों को छूता रहा, लेकिन उसके बाद पहली बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2007 के बाद 2012 में भी वे चुनाव हार गए। इसके बाद उन्होंने अपनी सियासी कर्मभूमि छोटे पुत्र विनय शंकर तिवारी को सौंप दी। साल 2017 में विनय शंकर बीएसपी से चुनाव लड़े और पूर्व मंत्री राजेश तिवारी को हराकर पुश्तैनी सीट पर कब्जा जमाया।