गोरखपुर शहर के छोटे-बड़े अस्पतालों में जगह नहीं बची है। इसकी रिपोर्ट कोविड कमांड सेंटर से गुरुवार की रात आठ बजे स्वास्थ्य महकमे को भेज दी गई है। आईसीयू व वेंटिलेटर युक्त बेड के लिए 17 से ज्यादा मरीजों की वेटिंग में हैं। अब मरीजों को भर्ती कराने के लिए नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी। ऐसा नहीं हुआ तो चुनौती और बढ़ जाएगी।
कोरोना से हाहाकार: गोरखपुर के सभी कोविड अस्पताल हाउसफुल, वेटिंग में आईसीयू-वेंटिलेटर के मरीज
गोरखपुर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा है। औसतन रोजाना 800 से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं। इससे चुनौती बढ़ गई है। ज्यादातर सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं बची है। स्वाथ्य महकमे को जो रिपोर्ट भेजी गइ है, उसके मुताबिक सामान्य मरीजों (एल-1) के लिए उदय हॉस्पिटल गोलघर में एक बेड खाली है। जिन मरीजों को सांस लेने में दिक्कत और ऑक्सीजन की जरूरत (एल-2) है, उन्हें भी राहत नहीं मिल पा रही है।
इस श्रेणी के महज दो बेड टीबी अस्पताल में खाली हैं। गंभीर मरीजों (एल-3)के लिए एक भी बेड खाली नहीं है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज, पनेशिया, दुर्गावती, आरके इमरजेंसी व गर्ग हॉस्पिटल के सभी बेड भरे हैं। इस श्रेणी के मरीजों को आईसीयू या फिर वेंटिलेटर युक्त बेड की जरूरत होती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज का 500 बेड का कोविड वार्ड फुल है। पनेशिया में ही 96 मरीज भर्ती हैं। अगर इन अस्पतालों में मरीजों को भेजा जाता है तो घंटों इंतजार करना पड़ता है। भर्ती होने के इंतजार में मरीज एंबुलेंस में दम तोड़ देते हैं। इस तरह का मामला बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सामने आ चुका है।
दूसरी लहर की तैयारियां अधूरी
कोरोना के पहले लहर के मुकाबले इस बार की तैयारियां कमजोर दिख रही हैं। अभी तक वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज का अस्थायी हॉस्पिटल नहीं शुरू किया गया है। पहली लहर के दौरान कॉलेज परिसर में 150 बेड की व्यवस्था की गई थी। मरीजों की संख्या बढ़ रही और बेड का संकट है, फिर भी रेलवे अस्पताल और एयरफोर्स हॉस्पिटल का संचालन नहीं शुरू किया गया। रक्षित हॉस्पिटल गीडा व राजबंशी हॉस्पिटल का नाम भी कोविड अस्पतालों की सूची में है लेकिन एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए। रक्षित हॉस्पिटल गीडा को बंद दिखाया गया है।
कर्मियों को सुननी पड़ रही तरह-तरह की बातें
सरकारी व निजी अस्पतालों में बेड न खाली होने का खामियाजा कोविड कमांड सेंटर के कर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। जिन मरीजों को अस्पतालों में जगह मिल जा रही है, उनके परिजन तारीफ करते हैं। जिनको अस्पताल में जगह नहीं मिलती वह परेशानी की हालत में तमाम तरह की बातें करते हैं। कहते हैं कि जब मदद नहीं करनी थी तो कोविड कमांड सेंटर बनाकर हेल्पलाइन नंबर क्यों जारी किया गसा। बहरहाल, चुनौतियों के बीच कोविड कमांड सेंटर से 22 मरीजों को भर्ती कराया गया है।