फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

प्रयागराज: हवा में उड़ी बालू तो गंगा किनारे दिखे दफन शव, बांस-बिस्तर देख कांप उठी रुह, देखें तस्वीरें

Sun, 16 May 2021 09:40 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 16 May 2021 09:40 AM IST
विज्ञापन
If sand flew into air, dead body was seen on banks of Ganges
श्मशान घाट - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में गंगा किनारे का यह दृश्य विचलित करने वाला है। हवा चलने से रेत हटी तो बालू में दफन किए गए शव दिखने लगे। सैकड़ों की संख्या में शव गंगा किनारे दफनाए गए थे। माना जा रहा है कि लकड़ी और धन की कमी के कारण इन शवों को यहां दफन किया गया था। पिछले दिनों गंगा, यमुना और रामगंगा नदी में बड़ी संख्या में शवो को उतराते देखा गया था। योगी ने नदियों में शव बहाने पर पाबंदी लगा दी थी। अब सरकार की सख्ती को देखते हुए नगर विकास विभाग ने निकाय स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया है। नगर महापौर और नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत स्तर पर गठित समितियों का अध्यक्ष चेयरमैन को बनाया गया है। आपको बता दें कि सदियों से लोगों की आस्था के रुप में पूजी जाने वाली मां गंगा का अस्तित्व झूंसी में खतरे में हैं। झूंसी के छतनाग गांव स्थित गंगा तट को लोगों ने कब्रिस्तान बना दिया है। वैसे तो छतनाग घाट को श्मशान घाट के रुप में ज्यादा मान्यता मिली हुई है लेकिन कोरोना संक्रमण में इन दिनों शव का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचने वाले लोग शव को बालू में दफनाकर मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। 




 
If sand flew into air, dead body was seen on banks of Ganges
हवा में उड़ी बालू तो गंगा किनारे दिखे दफन शव - फोटो : अमर उजाला
छतनाग घाट पर गंगा तट के तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी में सौ से ज्यादा लाशें दफनाई गई हैं। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन से इस पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है। आदिकाल से मां गंगा हिन्दुओं के लिए आस्था का प्रतीक रही है। मां गंगा को भारतीय संस्कृति का प्राण भी कहा जाता है लेकिन इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और लोगों की उदासीनता के चलते इसका अस्तित्व खतरे में है। मां गंगा की सफाई और इसे प्रदूषण मुक्त करने को केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन इसके  उलट हकीकत देखनी हो तो झूंसी के छतनाग घाट पर चले आइए।
If sand flew into air, dead body was seen on banks of Ganges
झूंसी के छतनाग घाट पर सैकड़ों की संख्या में दफनाए गए शव - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे की छतनाग घाट पर धज्जियां उड़ाई जा रही है। लोग मनमाने तरीके से मां गंगा को बुरी तरह प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। माघ, महाकुंभ और कुंभ के दौरान छतनाग घाट तक मेला बसाया जाता है। हालांकि इस दौरान शवों का अंतिम संस्कार यहां बंद करा दिया जाता है। छतनाग श्मशान घाट पर झूंसी के अलावां जौनपुर, प्रतापगढ़, हंडिया, गोपीगंज, ज्ञानपुर, बरौत, बादशाहपुर समेत कई शहरों से लोग शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। घाट के किनारे शव को जलाने के लिए लकड़ियों की भी कई टाल हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
If sand flew into air, dead body was seen on banks of Ganges
झूंसी के छतनाग गांव में गंगा तट को बनाया कब्रिस्तान - फोटो : अमर उजाला
इसके बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लोगों की भारी संख्या में हुई मौत के दौरान चंद पैसे बचाने के लिए मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। घाट पर मां गंगा की अविरल धारा से महज दो सौ मीटर दूर पर ही तकरीबन एक किलोमीटर की एरिया में सौ से ज्यादा लाशें बेखौफ दफनाई गई हैं। इससे छतनाग गांव समेत आसपास के लोग हतप्रभ हैं। ग्रामीणों ने शवों को दफनाए जाने पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है। 
 
विज्ञापन
If sand flew into air, dead body was seen on banks of Ganges
गंगा में उतरती लाश - फोटो : अमर उजाला
मजबूरी में छोड़ रहे हिन्दू रीति रिवाज
छतनाग श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे लोगों से जब अमर उजाला प्रतिनिधि ने बात की तो बताया कि कोरोना संक्रमण काल में काम धंधा सब चौपट है। शव का क्रिया कर्म करने में कम से कम दस से बारह हजार रुपये का खर्च आता है। जो इस वक्त उनके लिए बहुत बड़ी रकम है। इसलिए वे हिन्दू परंपरा को छोड़कर शव को रेती मेें दफनाने के लिए मजबूर हैं। 
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed