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Shabnam Case: शबनम को याद करता रहता है सलीम, प्रेमिका की दया याचिका खारिज होने पर हो गया था बेचैन, लिखता है शायरी
Fri, 05 Mar 2021 11:45 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 05 Mar 2021 11:45 AM IST
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दोषी शबनम और सलीम
- फोटो : अमर उजाला
माता-पिता समेत परिवार के सात लोगों की हत्या की खूनी दास्तां लिखने वाली यूपी के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी नरसंहार की खलनायिका शबनम को मथुरा जेल में फांसी देने की तैयारी चल रही हैं। शबनम आजाद भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला बन सकती है। हालांकि शबनम का डेथ वारंट अभी जारी नहीं हुआ है। राज्यपाल को पुन: विचारण दया याचिका भेजे जाने के कारण डेथ वारंट जारी होने की प्रक्रिया रुक गई है।
शबनम और सलीम
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, 14/15 अप्रैल 2008 की रात अमरोहा जनपद के हसनपुर थानाक्षेत्र के गांव बावनखेड़ी में प्रेमिका शबनम के साथ मिलकर उसके परिवार के सात लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतारने वाला सलीम फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी बेफिक्र है। उसका कहना है कि साहब! काहे परेशान हो रहे हो, इतनी जल्दी मुझे न लगेगी फांसी वासी, यहां ऐसे थोड़े फांसी लग जाती है।
शबनम और सलीम
- फोटो : अमर उजाला
इतने विकल्प खुले हैं कि हमको फांसी लगते-लगते अभी वर्षों लग जाएंगे। सलीम ने माशूका के कहने पर उसके माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, रिश्ते की बहन को कुल्हाड़ी से काट डाला था। यह बातें आज भी वह जेल में साथी बंदियों को बताता है। नवंबर में अपनी दया याचिका पर हस्ताक्षर करने के लिए नैनी जेल में हाई सिक्योरिटी सेल से कार्यालय में लाए गए सलीम से जब वहां एक जेल अधिकारी ने कहा कि अब तो तुम्हें फांसी होकर रहेगी, तो उसने यह जवाब दिया कि यहां बचने के इतने विकल्प है कि फांसी होने में वर्षों लग जाएंगे।
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शबनम
- फोटो : अमर उजाला
जेल में शायरी लिखता है सलीम
परेशान मत होइए साहब, हमें इतनी जल्दी कुछ नहीं होने वाला है। हालांकि जब उसकी प्रेमिका शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति के यहां से खारिज हुई तो वह बेचैन हो गया था, लेकिन जैसे ही उसकी फांसी की तारीख एक बार आगे बढ़ी वह फिर से पुराने ढर्रे पर आ गया और शायरी लिखने लगा।
परेशान मत होइए साहब, हमें इतनी जल्दी कुछ नहीं होने वाला है। हालांकि जब उसकी प्रेमिका शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति के यहां से खारिज हुई तो वह बेचैन हो गया था, लेकिन जैसे ही उसकी फांसी की तारीख एक बार आगे बढ़ी वह फिर से पुराने ढर्रे पर आ गया और शायरी लिखने लगा।
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शबनम की वायरल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
जेल में शबनम को याद करता रहता है सलीम
वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि सलीम को कोई पश्चाताप न पहले था और न आज है। हालांकि जेल में उनकी जानकारी में उसने ऐसी कोई हरकत नहीं की और न कर रहा है, जिससे कि कोई परेशान है। उसका व्यवहार भी सबसे अच्छा रहता है। साथी कैदियों की मदद भी करता है। पांच वक्त का नमाजी है। हां शबनम को जरूर याद करता रहता है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि सलीम को कोई पश्चाताप न पहले था और न आज है। हालांकि जेल में उनकी जानकारी में उसने ऐसी कोई हरकत नहीं की और न कर रहा है, जिससे कि कोई परेशान है। उसका व्यवहार भी सबसे अच्छा रहता है। साथी कैदियों की मदद भी करता है। पांच वक्त का नमाजी है। हां शबनम को जरूर याद करता रहता है।