2015 एक ऐसा साल रहा है जिसमें अधिकतर राजनीति और राजनीतिक हमले पोस्टरों पर होते दिखाई दिए हैं। चाहे वो पीएम मोदी की बड़ाई करनी हो या उनपर हमले की बात हो या फिर दिल्ली में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच चला पोस्टर वार रहा हो। इन पोस्टरों में कुछ ऐसे भी पोस्टर रहे जिनके चलते मायावती जैसी नेता का भी भारी विरोध हुआ और फिर वो पोस्टर हटाए गए गलती के लिए माफी भी मांगी गई।
2015 के वो पोस्टर जिन्होंने नेताओं से भी ज्यादा बटोरीं सुर्खियां
2015 के जिन पोस्टरों की सबसे ज्यादा चर्चा रही उनमें दिल्ली भाजपा नेता विजय गोयल द्वारा लगाया गया ये पोस्टर रहा जो उन्होंने पीएम मोदी की प्रशंसा में लगवाया था। इसमें उन्होंने मोदी जी की तुलना महात्मा गांधी से की गई थी। विपक्षियों ने इसकी बहुत आलोचना की थी और बीजेपी को इसके लिए सफाई तक देनी पड़ी थी।
2015 के वो पोस्टर जिन्होंने नेताओं से भी ज्यादा बटोरीं सुर्खियां
बिहार चुनाव के बाद हुई महागठबंधन की जीत और नीतीश कुमार व केजरीवाल की नजदीकियों का परिणाम रहा ये पोस्टर। महागठबंधन की जीत के बाद नीतीश के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने गए केजरीवाल को लालू ने गले लगाया था और बाद में दोनों ने संग में हाथ भी उठाकर लोगों का अभिवादन किया था। लालू के गले लगते ही सभी न्यूज चैनलों पर तेज बहस शुरू हो गई थी और सोशल मीडिया में तो कई दिन तक ये चला था कि 'केजरीवाल ने लगाया भ्रष्टाचार को गले।' लालू से गले मिलने के बाद केजरीवाल पर इतने सवाल खड़े हुए थे कि उन्हें और पूरी पार्टी को इस पर जगह-जगह सफाई देनी पड़ी थी। उसके बाद ही ये पोस्टर शहर में जगह-जगह लगे थे और इसे भाजपा ने लगवाया था।
2015 के वो पोस्टर जिन्होंने नेताओं से भी ज्यादा बटोरीं सुर्खियां
इस साल दिल्ली में डेंगू से सबसे ज्यादा मौतें हुई। कहा जाता है कि आप सरकार अगर पहले से इसकी रोकथाम के लिए व्यापक कदम उठाती तो इन्हें रोका जा सकता था। इसी को लेकर विपक्ष ने केजरीवाल सरकार से जवाब मांगते हुए इस पोस्टर को लगाया था। जिसके बाद डेंगू को लेकर राजनीति तेज हो गई थी।
2015 के वो पोस्टर जिन्होंने नेताओं से भी ज्यादा बटोरीं सुर्खियां
गाजियाबाद में चुनावी मौसम आया तो विकास कार्यों का श्रेय लेने का भी दौर शुरू हो गया। इसी बीच इस साल भाजपाई नेताओं ने अतिउत्साह में अपने पोस्टर पर सपा नेता का नाम लिख दिया था जिसके बाद सपा नेता नूर मोह्म्मद ने उनके खिलाफ मानहानि केस तक कराने का फैसला कर लिया था। बाद में होर्डिंग लगाने वाले भाजपा नेता अतुल गर्ग ने नामित पार्षद का नाम लिखे जाने को ‘चूक’ बताते हुए खेद जताया, लेकिन सपा पार्षदों का कहना था कि उनकी ‘चूक’ से पब्लिक में उनका क्रेडिट चला गया और मनोनीत पार्षद के कॅरियर पर बन आई।