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विधवाओं का यह कैसा सम्मान, शौर्य चक्र विजेता की विधवा को 8 साल से नहीं मिली पेंशन

Sat, 05 Nov 2016 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 05 Nov 2016 11:54 AM IST
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widow of shourya chakra winner has not receive pension from 8 years
सुशीला देवी शहीद की व‌िधवा - फोटो : अमर उजाला

शौर्य चक्र मिलने के बावजूद शहीद सैनिक की विधवा को हरियाणा सरकार की ओर से पेंशन नहीं मिल पा रही है। विधवा पिछले 8 साल से पेंशन के लिए भटक रही है।



क्षेत्रीय सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह दो बार प्रदेश सरकार को पेंशन के लिए पत्राचार कर चुके हैं। इसके बाद भी पेंशन शुरू नहीं हो पाई है। सरकार की इस अनदेखी को लेकर शहीद के परिजनों में रोष है।

शहीद सैनिक की पीड़ित विधवा सुशीला देवी गांव मोहम्मदपुर अहीर तावडू के पति देव कुमार भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल में बतौर कांस्टबेल के पद पर कार्यरत थे। वह अफगानिस्तान के जांरज गुड़गुडी में बीआरओके कार्मिकों की रक्षा में तैनात थे।

5 जून 2008 को कार्मिकों की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे

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शहीद की विधवा - फोटो : अमर उजाला

5 जून 2008 को कार्मिकों की रक्षा करते हुए वह आतंकवादियों द्वारा किए आतमघाती हमले में शहीद हो गए। सुशीला देवी ने बताया कि उसे 19 मार्च 2009 को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा शहीद को मरणोपरांत शौर्य चक्र दिया गया था। पीड़िता का कहना है की शौर्य चक्र मिलने वाली हर विधवा को प्रदेश सरकार की ओर से शौर्य पेंशन प्रदान की जाती है।

परंतु उसे अभी तक पेंशन नहीं मिल पाई है। पीड़ित विधवा का कहना है कि एक तरफ केंद्र सरकार सैनिक व उनकी विधवाओं को हर सुविधा उपलब्ध कराने व सम्मान की बात कर रही है लेकिन विधवाओं के लिए यह कैसा सम्मान है कि उन्हें आठ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पेंशन के लिए ठोकरें खानी पड़ रही है।

पीड़िता ने बताया कि केंद्रीय मंत्री एंव सांसद राव इंद्रजीत सिंह द्वारा दिसंबर 2014 व जुलाई 2016 में प्रदेश सरकार को शौर्य चक्र पेंशन शुरू करने के लिए पत्राचार किया गया। उसके बाद भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने शासन-प्रशासन से पेंशन दिलवाने की मांग की है।

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