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कहां है निर्भया के साथ सबसे ज्यादा दरिंदगी करने वाला नाबालिग दोषी, गांव-घर आज भी शर्मिंदा

Thu, 09 Jan 2020 04:50 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 09 Jan 2020 04:50 PM IST
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who is nirbhaya juvenile convict most brutally assaulted her living lone life family hate him

सात साल पहले देश को दहला देने वाले निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले के दोषियों को फांसी पर लटकाने का दिन और वक्त मुकर्रर हो गया। पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार अपराह्न 4:48 बजे इस मामले के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी कर दिया। इसके मुताबिक 22 जनवरी सुबह 7 बजे निर्भया के गुनहगारों को तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। इस फैसले के बाद तिहाड़ में दोषियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। वैसे तो निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में छह दोषी थे लेकिन फांसी की सजा सिर्फ चार को हो रही है क्योंकि एक दोषी राम सिंह ने तिहाड़ में ही फांसी लगा ली थी और एक दोषी नाबालिग था जो आज गुमनामी की जिंदगी जी रहा है। आज इस स्टोरी में हम आपको बताएंगे कि निर्भया के साथ सबसे ज्यादा दरिंदगी करने वाला नाबालिग दोषी अब कहां है और उसका घर-परिवार उसके बारे में क्या सोचता है...

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- फोटो : अमर उजाला

निर्भया कांड का जब-जब जिक्र होगा, तब-तब लोग उस दरिंदे को याद करेंगे, जिसने निर्भया के साथ सबसे ज्यादा बेरहम सुलूक किया। भले ही वह उस वक्त नाबालिग था। आज वह जहां भी होगा लगभग 24 साल का हो गया होगा। निर्भया का छठा आरोपी 16 दिसंबर, 2012 के दिन जरूर नाबालिग था लेकिन वह कुछ महीने बाद ही बालिग होने वाला था।हालांकि उस समय के कानून के मुताबिक उसे नाबालिग ही माना गया और मौजूदा कानून के आधार पर उसे सजा देने की बजाए सुधार गृह में भेजने का फैसला सुनाया था। इसी घटना के बाद नाबालिगों की उम्र 18 से 16 कर दी गई।

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निर्भया के साथ हुई दरिंदगी में शामिल यह तत्कालीन नाबालिग अब 24 साल का हो चुका है। कुछ सालों तक बाल सुधार गृह में रहने के बाद उसे दिसंबर 2016 में मुक्त कर दिया गया। फिलहाल वह दक्षिण भारत के किसी राज्य में कुक का काम कर रहा है। उसने दिल्ली में प्रेक्षणगृह में खाना पकाने का काम सीखा था। एक एनजीओ के अधिकारी ने बताया कि उसने अपना नया नाम रख लिया है। 

एनजीओ के अधिकारी ने बताया कि उसकी असली पहचान और पुरानी जिंदगी की असलियत को छिपाने के लिए उसे दिल्ली एनसीआर से बहुत दूर भेज दिया गया है, जिससे लोग उसका पता न लगा सकें और वह एक नई जिंदगी शुरू कर सके। जहां वह काम करता है वहां भी लोगों को उसके वास्तविक नाम के बारे में नहीं पता और न ही कोई उसकी पिछली जिंदगी से अवगत है। 

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नाबालिग आरोपी के गांववालों को भी नहीं पता कि वह अब कहां है। लेकिन लोग गांव के लिए उसे कलंक मानते हैं। ये अलग बात है कि वक्त की धूल उनके गुस्से पर जम गई है। लेकिन घटना का जिक्र छिड़ते ही आज भी वह शर्मिंदगी महसूस करने लगते हैं। कहते हैं उसने जो किया। वह गलत किया। अब हम उससे कोई मतलब नहीं रखना चाहते।

मां बोली- आठ साल का था, जब घर से निकला, इसके बाद तो पुलिस उसे ढूंढते हुए आई
इस्लामनगर में दरिंदे की मां घर के बाहर शॉल ओढ़कर चारपाई पर लेटी थी। उसके बारे में पूछा तो बोली पता नहीं कहां है। जब से गया है, तब से आज तक बात नहीं हुई। न ही उसका चेहरा देखा है। उन्होंने बताया कि लगभग आठ साल का रहा होगा, जब गांव के ही कुछ लोग दिल्ली में नौकरी कराने के लिए ले गए थे। तीन चार महीने तक उसने घर पर पैसा भी भेजा। लेकिन उसके बाद पैसा भेजना बंद कर दिया। उसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। जब पुलिस घर आई तो पता चला कि उसने क्या किया है।

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निर्भयाकांड के दोषी के घर आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पिता मानसिक मंदित हैं। घर में मां के अलावा दो छोटी बहनें और तीन भाई हैं। भाइयों की उम्र 15 साल, 13 साल व 11 साल है। दोषी को कुछ सालों तक बाल सुधार गृह में रखने के बाद दिसंबर-16 में रिहा कर दिया गया था। मां का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि वह कहां है। बताया जाता है कि उसे किसी एनजीओ को दे दिया गया। हालांकि कुछ गांव वालों के मुताबिक उन्होंने पिछली ईद पर उसे घर में देखा था। एक ग्रामीण ने बताया कि ईद पर उधर से निकलते समय कुछ बच्चों ने शोर मचा दिया था कि लड़का आया है, तो उनकी नजर उस पर पड़ी थी।

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