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अनाज मंडी हादसा : मोर्चरी पर सुबह से गूंज रही थीं सिसकियां व चीखें, दिल दहला देने वाला मंजर

Tue, 10 Dec 2019 05:47 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 10 Dec 2019 05:47 AM IST
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Sobs were echoing on the morchary since morning in anaj mandi case
अचानक ही टूट गया दुखों का पहाड़ - फोटो : PTI
अनाज मंडी हादसे में किसी ने बेटा तो किसी ने भाई खो दिया। भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार के इस खेल में कई जिंदगियां और परिवार तबाह हो गए। इस तबाही को झेलने वालों की चीखें अस्पताल में आने-जाने वाले हर शख्स के कानों में गूंज रही थीं। किसी का बच्चा रो रहा था तो किसी की मां। किसी के बुजुर्ग दादा कंपकंपाते हुए अपने लाडले के जाने का मातम मना रहा थे तो कुछ भ्रष्ट तंत्र को बदुआएं दे रहे थे। 


इसी बीच लोकनायक अस्पताल की मोर्चरी के ठीक सामने लाल रंग की जैकेट में गुमसुम एक मासूम बैठा था। ठंड में मासूम को अपने सीने से लगाए एक बुजुर्ग महिला भी थी, जिनकी आंखों से मन की पीड़ा बाहर निकल रही थी। बातचीत में तकरीबन 8 वर्षीय उस बच्चे ने अपना नाम अली अहमद बताया। उसके पिता का नाम था इमरान अहमद। 

यह परिवार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के गांव कुरी रवाना का है। इस परिवार के दोनों ही कमाऊ बेटे अनाज मंडी हादसे में जान गवां चुके हैं। 35 वर्षीय इमरान और उसका 33 वर्षीय भाई इकराम की दम घुटने से मौत हो गई। इसी गांव के 20 वर्षीय समीर ने भी उसी इमारत में दम तोड़ दिया था। 

अपनी नानी के साथ बैठा अली अहमद भले ही मासूम है, लेकिन अपने पिता और चाचा की मौत होने का दर्द वह महसूस कर रहा था। मायूस चेहरे और सूखे होठ उसके गहरे दुख को बयां करने के लिए काफी थे। अली बताता है कि जब घर पर पता चला कि पापा और चाचा की मौत हो गई है तो हर कोई अचंभित था। पूरे गांव में हर कोई स्तब्ध था। 

ये तीनों युवक बैग बनाने के कारखाने में काम करते थे। इमरान और इकराम के पिता जमील अहमद भी वहां मौजूद थे। इन्हीं की शिनाख्त के बाद सोमवार दोपहर को दोनों भाईयों का पोस्टमार्टम हुआ और शव परिजनों को सौंप दिए। इसके बाद परिजन एंबुलेंस में शव लेकर अपने गांव के लिए रवाना हुए।

डॉक्टर बोले-कभी नहीं देखे एक ही दिन में इतने शव

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दिल्ली में भीषण आग - फोटो : PTI
दिल्ली के शीर्ष तीन में शामिल लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) की मोर्चरी में दिल दहला देने वाला मंजर था। रविवार शाम तक यहां 34 शव पहुंच चुके थे। शवों से लबालब मोर्चरी में कुछ लाशें पूरी तरह जली थीं तो कुछ अधजली। अस्पताल के फॉरेंसिक डॉक्टरों की मानें तो एम्स और सब्जी मंडी मोर्चरी के बाद तीसरे स्थान पर एलएनजेपी अस्पताल है। इससे पहले, अस्पताल में एक ही घटना से जुड़े सर्वाधिक शव बुराड़ी कांड के आए थे। इसमें एक ही परिवार के 11 लोगों ने फांसी लगाई थी। 

हालांकि, इतनी तादाद में 5 से 10 वर्ष के बीच उन्होंने शव नहीं देखे। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि मोर्चरी में ऐसा दृश्य उन्होंने इससे पहले नहीं देखा। आमतौर पर एक दिन में 7 से 8 पोस्टमार्टम होते हैं। कई बार एक दिन में 15 तक भी हो जाते हैं, लेकिन इस बार संख्या कहीं ज्यादा है। अस्पताल के फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. मित्तल ने बताया कि वे दो दिन के लिए बाहर हैं। हालांकि उन्हें घटना के बारे में जानकारी है। वहां पूरी टीम काम कर रही है।

सोमवार सुबह पुलिस ने कागजी कार्यवाही पूरी करनी शुरू की तो डॉक्टरों ने भी पोस्टमार्टम शुरू कर दिया। शवों से आती गंध ने उन्हें काफी विचलित भी किया। उधर कागजी कार्यवाही काफी लंबी होने के चलते पोस्टमार्टम भी मंद गति से करने पड़े। लाखों रुपये के मुआवजे की घोषणा के बाद पुलिसवाले आधार कार्ड आदि से मृतक और पंचनामे पर दस्तखत करने वाले के बीच रिश्ते की ठोस पहचान मिलने पर ही कार्यवाही को आगे बढ़ा रहे थे।

फ्रिज में रखने पड़े क्षमता से ज्यादा शव

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delhi fire - फोटो : अमर उजाला
लोकनायक अस्पताल में रविवार रात को एक ही फ्रिज में एक से ज्यादा शवों को रखना पड़ा। इसके बाद भी शवगृह में गंदगी फैल गई थी। दरअसल यहां कुल 45 फ्रिज हैं, जबकि शव इससे ज्यादा थे। 

शनिवार और रविवार को पोस्टमार्टम कम होने और अनाज मंडी हादसे में मारे गए लोगों में से 34 शवों को पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था। इसलिए एक फ्रिज में एक से ज्यादा शव रखने पड़े। 
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43 में से 21 शव परिजनों को सौंपे, दो दिन और लगेंगे पोस्टमार्टम में

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delhi anaj mandi fire - फोटो : अमर उजाला
अनाज मंडी अग्निकांड में मरे 43 लोगों में से 21 के शव सोमवार को उनके परिजनों को सौंप दिए गए। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 9 शवों का पोस्टमार्टम हुआ। वहीं, लोकनायक अस्पताल में 34 मृतकों से 12 शवों का पोस्टमार्टम सोमवार शाम 6 बजे तक हुआ। बाकी बचे 22 शवों को फ्रिजर में रख दिया गया है। 

अब मंगलवार और बुधवार को इन शवों के पोस्टमार्टम किए जाएंगे। दिल्ली में ऐसा पहली बार है जब एक ही घटना में मारे गए लोगों के शवों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों को तीन दिन तक करने पड़ेंगे। जानकारी के मुताबिक लोकनायक अस्पताल में मुरादाबाद निवासी इमरान और इकराम के पोस्टमार्टम कर शवों को परिजनों को सौंप दिए गए। 
 
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Delhi Fire - फोटो : अमर उजाला
इसके बिजनौर जिला निवासी मुशर्रफ अली और साजिद (तौफीर) के शवों का पोस्टमार्टम हो चुका है। वहीं बिहार के मधुबनी निवासी शाकिर और समस्तीपुर के मुखिया का शव सौंप दिया है। बाकी के बारे में पुलिस ने नहीं बताया है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में रखे मृतक बबलू, महबूब, असाबूल सहित 9 शवों का पोस्टमार्टम कर दिया है। 
 
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