ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में मॉल के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर कार सवार सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के चार दिन बाद पुलिस-प्रशासन हरकत में आया। कार को निकालने के साथ ही मंगवार का विशेष जांच दल (एसआईटी) की तफ्तीश शुरू हो गई। एसआईटी अपनी जांच सीधे तौर पर हादसे के कारण और बचाव में देरी के जिम्मेदारों की तलाशने के लिए करेगी।
अधिकारियों ने जांच को पांच दिन में चरणबद्ध रूप से करने का निर्णय लिया है। पहले दिन दो चरण पूरे हुए। इसमें जांच अधिकारियों ने प्राधिकरण, पुलिस, प्रशासन और पीड़ित पक्ष से हादसे से जुड़ी जानकारी ली। इसमें सामने आए तथ्यों का अवलोकन घटनास्थल पर जाकर किया। फिर शाम को प्राधिकरण दफ्तर पहुंच कर निष्कर्ष निकाला। आगे की जांच बुधवार से फिर शुरू होगी।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
एसआईटी की अगुवाई कर रहे एडीजी मेरठ जोन भानु भाष्कर, मेरठ मंडल कमिश्नर और चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी दोपहर में नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर पहुंचने के बाद करीब ढाई घंटे तक रहे। इस दौरान प्राधिकरण के सभी अधिकारियों को पहले तल पर बुलाया गया था।
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नोएडा के सेक्टर -150 स्थित गड्ढे में जहां कार गिरी थी उसके दूसरी तरफ भी नहीं है कोई बैरिकेड
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, ग्रेटर नोएडा डीसीपी, एसडीआरएफ के जवान भी पहुंचे थे, लेकिन जांच टीम ने अधिकारियों में सिर्फ पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, एसीईओ कृष्णा करुणेश व डीएम मेधा रूपम से बात की। माना जा रहा है कि अलग-अलग विभागों के प्रमुखों से घटना को लेकर जानकारी ली गई।
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नोएडा के सेक्टर-150 में हुए हादसे के बाद घटना स्थल पर लगाए गए बैरियर
- फोटो : अमर उजाला
शाम को वापस पहुंचने पर जिस जगह पर हादसा हुआ है उस प्लॉट के प्राधिकरण से आवंटन और स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी कुछ जानकारियां ली गई हैं। जांच टीम की अगुवाई कर रहे एडीजी जोन मेरठ भानु भास्कर ने कहा कि एसआईटी को 5 दिन का समय सरकार की तरफ से दिया गया है।
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नोएडा के सेक्टर-150 में हुई कार दुर्घटना के बाद मौके पर जुटी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को पहले चरण की बैठक हुई और दूसरे चरण में निरीक्षण व चर्चा की गई। जांच को आगे सभी पहलुओं पर बढ़ाया जाएगा। एसआईटी अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।