फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Nithari Case Victim father allegation regarding Surendra Koli suspicious death not suicide it is murder

'आत्महत्या नहीं, ये हत्या है': सुरेंद्र कोली की मौत पर सवाल, कौन है झब्बू लाल जिसे नहीं पच रही ये बात?

Fri, 18 Sep 2026 05:23 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, नोएडा
पीटीआई, नोएडा Published by: विकास कुमार Updated Fri, 18 Sep 2026 05:23 PM IST
सार

झब्बू लाल का कहना है कि अगर कोली को जेल के अंदर आत्महत्या करनी होती तो समझा जा सकता था कि वह डिप्रेशन में था, लेकिन जेल से रिहा होने और कई महीने बाहर बिताने के बाद ऐसा कदम उठाना कई संदेह पैदा करता है।
 

विज्ञापन
Nithari Case Victim father allegation regarding Surendra Koli suspicious death not suicide it is murder
सुरेंद्र कोली - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

बहुचर्चित 2006 नोएडा के निठारी कांड के एक पीड़ित परिवार ने सुरेंद्र कोली की मौत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में अपनी 15 वर्षीय बेटी को खोने वाले पिता झब्बू लाल (64) ने दावा किया है कि सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है।

विज्ञापन


विज्ञापन

चाय की दुकान पर लटकी मिली लाश
हरिद्वार के सप्त सरोवर रोड पर एक किराए की चाय की दुकान पर सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका हुआ मिला था। पुलिस इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम की कार्रवाई कर रही है। हालांकि, पीड़ित पिता ने इस थ्योरी को खारिज करते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
 

विज्ञापन

पिता के बड़े दावे और सवाल
झब्बू लाल का कहना है कि अगर कोली को जेल के अंदर आत्महत्या करनी होती तो समझा जा सकता था कि वह डिप्रेशन में था, लेकिन जेल से रिहा होने और कई महीने बाहर बिताने के बाद ऐसा कदम उठाना कई संदेह पैदा करता है।

विज्ञापन

बड़ा राज खुलने का था डर
पीड़ित पिता ने आरोप लगाया कि सुरेंद्र शायद कोई बहुत महत्वपूर्ण जानकारी उजागर करने वाला था, इसीलिए उसकी हत्या कर दी गई है। झब्बू लाल ने एक बार फिर दावा किया कि कोली मुख्य अपराधी नहीं था, बल्कि उसके मालिक और व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर (जिसके घर कोली काम करता था) मुख्य आरोपी था, जिसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

न्याय की लंबी लड़ाई 
लगभग दो दशकों से अपनी बेटी के इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे बुजुर्ग दंपती ने कहा कि अब अकेले लड़ना उनके बस में नहीं है, अगर सरकार मदद करे तभी वे आगे की लड़ाई जारी रख सकेंगे।

रिहाई के बाद चला रहा था चाय की दुकान
गिरफ्तारी के समय 30 साल के सुरेंद्र कोली को कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में अदालतों ने उसे सभी 13 मामलों में बरी कर दिया। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी उसकी क्यूरेटिव पिटीशन मंजूर करते हुए उसे बरी कर दिया था, जिसके बाद वह ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा होकर हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed