राजधानी में प्रदूषण लोगों की सांस फुला रहा है। ऐसे में इसे नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) को लागू किए एक माह के करीब हो गया है। इसके बावजूद सरकार व प्रशासन की लापरवाही देखने को मिल रही है।
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झाड़ू से उड़ती धूल
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वायु गुणवत्ता में गिरावट को रोकने के लिए अलग-अलग परिस्थितियों को देखते हुए ग्रैप के तीन चरण लागू किए गए हैं। यह चरण 'गंभीर' वायु गुणवत्ता यानी एक्यूआई 401-450 के बीच होने पर लागू किया जाता है। आलम यह है कि इसके नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है। कहीं पर खुले में निर्माण सामग्री बिखरी हुई है, तो कहीं पर बगैर मशीन के झाड़ू लगता नजर आया। इससे सड़कों पर धूल उड़ रही है।
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खुले में पड़ी है निर्माण सामग्री
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खुले में पड़ी है निर्माण सामग्री
संसद भवन के पास रफी मार्ग पर खुले में ही निर्माण सामग्री पड़ी नजर आई। फुटपाथ पर यह निर्माण सामग्री से रेत सड़क पर बिखर रहा है। ऐसे में वाहनों के चलने से रेत उड़ रही है। यहां सरकारी विभाग में कार्य करने वाले नीरज कहते हैं कि एक तरफ सरकार प्रदूषण को लेकर सख्ती दिखा रही है। वहीं, दूसरी ओर सड़कों पर ही खुले में नियमों को तोड़ा जा रहा है। वह कहते हैं कि शाम के समय यहां से निकलते समय अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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पानी की बौछार से प्रदूषण कम करने की कोशिश
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मशीन से नहीं हो रही सड़कों की सफाई
सरकार का आदेश है कि सड़कों व फुटपाथ की सफाई मशीन से की जाए। लेकिन, अब भी सफाई झाड़ू से की जा रही है। सरोजनी नगर में निर्माण कार्य चल रहा है। यहां राजमाता विजयराजे सिंधिया मार्ग में धूल की मोटी परत जम गई है। यहां मशीन से सड़कों की सफाई न कर, झाड़ू से सफाई की जा रही है। इससे यहां हर समय धूल उड़ रही है। जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानी निवासी गौरव कहते हैं कि यहां पैदल जाने वाले राहगीरों का धूल से बुरा हाल है। इसकी कई बार शिकायत की जा चुकी है, इसके बावजूद कोई इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।
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प्रदूषण की चादर में ढकी दिल्ली
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तेज हवा चलते ही उड़ने लगती है धूल
रंजीत नगर व करोल बाग के पास खुले में ही निर्माण सामग्री रखी हुई है। तेज हवा चलते ही यहां से धूल उड़ती दिखी। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लापरवाही देखने को मिली। निर्माण सामग्री बेचने वाले गोविंद ने कहा कि नियमों के बारे में बोर्ड लगाए जाने चाहिए। अभी तक उन्हें किसी भी तरह की पाबंदी व नियमों को लेकर कोई जानकारी नहीं है। वह कहते हैं कि गोदाम में इतनी जगह नहीं जिससे यह सामग्री रखी जा सके। बाहर खुले में रखना मजबूरी है।