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निठारी कांडः खाना बनाने के लिए कोली को चंडीगढ़ से लाया था पंढेर, कॉल गर्ल लाते देख सुरेंद्र बना था हैवान

Sat, 16 Jan 2021 09:55 AM IST
पूजा त्रिपाठी आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद
आशुतोष यादव, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 16 Jan 2021 09:55 AM IST
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nithari case: Moninder singh pandher bring surendra koli from Chandigarh as cook after seeing call girls koli demon rises in him
मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

नोएडा सेक्टर-31 के पास गांव निठारी की डी-5 नंबर की कोठी मोनिंदर सिंह पंढेर ने 2005 में खरीदी थी। घर-परिवार चंडीगढ़ में होने की वजह से नोएडा में रहने का ठिकाना बनाया था, क्योंकि नोएडा में ही उसकी कंपनी थी। नोएडा में परिवार नहीं होने से मोनिंदर ने चंडीगढ़ में नौकरी कर चुके सुरेंद्र कोली को नोएडा बुला लिया। सुरेंद्र खाना बनाने में एक्सपर्ट था। खासतौर पर नॉनवेज बनाने में। इसलिए मोनिंदर सिंह ने उसे नोएडा में अपने पास रख लिया। वह कोठी में ही छत पर बने एक कमरे में रहने लगा, लेकिन महीने में अधिकांश दिन मोनिंदर सिंह कहीं न कहीं टूर पर ही रहता था। लिहाजा, कोठी में मालिक की तरह सुरेंद्र ही रहता था।

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nithari case - फोटो : अमर उजाला

इस तरह से खुला था राज
निठारी कांड का पहला अंदेशा पंढेर के पड़ोसियों को ही हुआ था। दो लोग जिनकी बेटियां गुम गईं थीं, उन्हें पंढेर के नौकर सुरेंद्र कोली के वारदात में शामिल होने पर शक हुआ। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस के पास भी की, लेकिन पुलिस से उन्हें खास सहयोग नहीं मिला। बाद में उन्होंने रेजिडेंट्स वेलफेयर के सदस्यों की मदद से पंढेर के घर की टंकी की तलाशी ली। उसमें एक सड़ा हुआ हाथ भी मिला था। पुलिस के सामने कोली ने हत्या की वारदात स्वीकार की। इसके बाद पंढेर के घर की खुदाई की गई। करीब 15 खोपड़ियां और कई हड्डियां मिलीं, बाद में डीएनए मैचिंग से पता चला वहां करीब 19 लोगों को गाड़ा गया था।

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nithari case - फोटो : अमर उजाला

कैसे हुई इन सब की शुरुआत
ऐसा नहीं है कि सुरेंद्र कोली पर पहले से कोई मुकदमा दर्ज रहा हो, उसके मुताबिक उसका मालिक (पंढेर) कई बार कॉल गर्ल घर पर लाया करता था। उन्हें आते-जाते देखते हुए उसके मन में मानव शरीर को काटने की प्रबल इच्छा पैदा होने लगी। इसके मुताबिक, कोली अपने शिकारों को पहले फंसाता था। हर केस में पहले वह पीड़ित को मारकर बेहोश कर देता था। उसके बाद दुष्कर्म की कोशिश करता था। इसके बाद पीड़ित को मारकर उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर देता था। फिर उन्हें गाड़ देता था या ड्रेनेज में बहा देता था।

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nithari case - फोटो : अमर उजाला

निठारी कांड : कब क्या हुआ 
29 दिसंबर 2006 : नोएडा में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले।
29 दिसंबर 2006 : मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंदर कोली को गिरफ्तार किया गया। 
30 दिसंबर 2006 : सीबीआई को मानव हड्डियों के कुछ हिस्से और 40 ऐसे पैकेट मिले, जिनमें मानव अंगों को भरकर फेंका गया था। 
31 दिसंबर 2006 : दो पुलिस कांस्टेबल को बर्खास्त किया गया। 
5 जनवरी 2007 : पंढेर और कोली को पुलिस नार्को टेस्ट के लिए गांधीनगर लेकर गई। 
10 जनवरी 2007 : सीबीआई ने पंढेर और कोली से पूछताछ की और कुछ ही दिनों में जांच करने के लिए निठारी पहुंची। पंढेर के घर के आसपास और भी हड्डियां बरामद की गईं। 
25 जनवरी 2007 - पंढेर और कोली के साथ गाजियाबाद कोर्ट परिसर में मारपीट हुई। सीबीआई दोनों को पेश करने के लिए अदालत लाई थी। 
7 अप्रैल 2007 : मृतका के कंकाल की शिनाख्त उसके सलवार सूट और चप्पलों के जरिये हुई। बाद में कोली ने बालों के क्लिप को भी पहचाना। 
8 फरवरी 2007 : कोली और पंढेर को 14 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया। 
मई 2007 : सीबीआई ने पंढेर को अपनी चार्जशीट में अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। दो माह बाद अदालत की फटकार के बाद सीबीआई ने पंढेर को मामले में सहअभियुक्त बनाया। 

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पंधेर की कोठी - फोटो : राजन राय/अमर उजाला

13 फरवरी 2009 : विशेष अदालत ने पंढेर और कोली को 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई। मामले में ये पहला ऐसा फैसला था। 
11 सितंबर 2009 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी किया और सुरेंद्र कोली की मौत की सजा बरकरार रखी। 
4 मई 2010 : सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सुरेंद्र कोली को सात वर्षीय बच्ची की हत्या का दोषी पाया। 
3 सितंबर 2014 : कोली के खिलाफ कोर्ट ने डेथ वारंट भी जारी किया। 
4 सितंबर 2014 : कोली को डासना जेल से मेरठ जेल फांसी के लिए ट्रांसफर किया गया। 
12 सितंबर 2014 से पहले सुरेंदर कोली को फांसी दी जानी थी। वकीलों के समूह 'डेथ पेनल्टी लिटिगेशन ग्रुप' ने कोली को मृत्युदंड दिए जाने पर पुनर्विचार याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा। 
12 सितंबर 2014 : सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा पर अक्तूबर 29 तक के लिए रोक लगाई। 
28 अक्तूबर 2014 : सुरेंद्र कोली की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को खारिज किया। 2014 में राष्ट्रपति ने भी दया याचिका रद्द कर दी। 
28 जनवरी 2015 : हत्या मामले में कोली की फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील किया।

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