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म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के: बेटी को दूल्हा बनाकर बग्घी पर बैठाया, बैंड-बाजे की धुन पर झूमे घराती

Wed, 07 Dec 2022 02:27 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 07 Dec 2022 02:27 PM IST
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girl came out with a wedding procession from Himgiri Colony in Moradabad
दूल्हा बन बग्घी पर सवार लड़की - फोटो : अमर उजाला

म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के...। फिलम दंगल का यह प्रसिद्ध संवाद तो आपने सुना ही होगा। इसे अनूठे तरीके से पेश किया शहर के हिमगिरी कॉलोनी निवासी आचार्य राजेश शर्मा ने। उन्होंने बेटी के विवाह से एक दिन पहले उसे दूल्हा बनाकर बग्घी पर बैठाया। बैंड बाजे की धुन पर घराती झूमते नाचते नजर आए। इसका उद्देश्य सिर्फ बेटियों को समाज में बराबरी से देखने का संदेश देना था।

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बेटी को बनाया दूल्हा - फोटो : अमर उजाला

मंगलवार शाम जब हिमगिरी कॉलोनी से यह अनूठी बरात निकली तो लोग कोतूहल भरी दृष्टि से देखते ही रह गए। घुड़चढ़ी के बाद परिवार के लोगों ने द्वारचार की रस्म भी पूरी की। मोहल्ले के लोग और रिश्तेदार इस बरात में शामिल हुए। आचार्य राजेश की फैशन डिजाइनर बेटी श्वेता भारद्वाज की शादी लाइनपार निवासी इंजीनियर राकेश शर्मा के बेटे इंजीनियर सिद्धांत शर्मा से बुधवार को हानी है। दोनों परिवारों की सहमति से शादी से पहले समाज को संदेश देने के लिए यह अनूठी रस्म अदा की गई।

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बेटी को बनाया दूल्हा - फोटो : अमर उजाला

श्वेता के पिता ने बताया कि समाज में आज भी ज्यादातर लोग बेटों और बेटियों में अंतर मानते हैं। बेटी के जन्म के समय उन्हें भी इन परिस्थतियों से गुजरना पड़ा था। तब उन्होंने ठान लिया किया बेटी को कभी असामनता महसूस नहीं होने देंगे। अपना यह संकल्प उन्होंने बेटी की शादी तक पूरा किया है।

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बग्घी पर सवार युवती - फोटो : अमर उजाला

पिता बोले 27 साल पुरानी गलती का पश्चाताप किया है
आचार्य राजेश शर्मा का कहना है कि 27 साल पहले जब बिटिया पैदा हुई थी तो  मैं खुश नहीं था। जबकि बेटे के जन्म पर खूब जश्न मनाया था। अपनी इस गलती का पश्चाताप करने की मैंने बहुत पहले ठान ली थी। उस गलती के बारे में सोचकर भी अफसोस होता था। आज मौका मिला तो मैंने अपनी भूल सुधारने का प्रयास किया है। उन्होंने समाज से बेटियों को समान अधिकार देने की अपील की।

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