आम आदमी पार्टी ने तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए बुधवार को दिल्ली के व्यापारी सुशील गुप्ता और चार्टर्ड अकाउंटेंट एनडी गुप्ता सहित संजय सिंह को राज्य सभा के लिए टिकट दे दिया। इसके बाद से ही पार्टी के अंदर और बाहर सुशील गुप्ता और एनडी गुप्ता की उम्मीदवारी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह आरोप तक लगाया गया कि पार्टी ने 100 करोड़ रुपये ले कर राज्य सभा टिकट की सीटें बेच दी हैं। जबकि पार्टी ने ये फैसला क्यों किया इसके पीछे ये पांच कारण बताए जा रहे हैं...
(1) सुशील गुप्ता का हरियाणा में मजबूत नेटवर्क है। हरियाणा के 14 जिलों में उनकी संस्थाएं काम कर रही है। उनका कोई आपराधिक रिकार्ड भी नहीं है। ऐसे में हरियाणा के लिये पार्टी ने इस नाम को बेहतर माना। नेटवर्क के अलावा हरियाणा के 15 फीसदी वैश्य मतदाताओं को आप से जोड़ने में यह मददगार हो सकते हैं। लिहाजा गुप्ता के नाम पर मुहर लगा दी गयी।
(2) चार्टर्ड अकाउटेंट एनडी गुप्ता के बारे में माना जाता है कि उन्होंने पार्टी के लिए चंदें में आने वाली रकम को न सिर्फ बढ़ाने में मदद की बल्कि, उसे कैसे मैनेज किया जाए ताकि आयकर विभाग के शिकंजे से बचा जा सके इसमें भी तकीनकी और कानूनी मदद की है। पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की इतनी बड़ी मदद करने वाले को पार्टी अनदेखा नहीं कर सकती थी। वैसे भी आमतौर पर यह धारणा है कि कोई भी राजनीतिक दल राज्य सभा में ऐसे ही लोगों को भेजता है जो पार्टी के लिए पर्दे के पीछे रह कर काम करते हैं। आमतौर पर लोकप्रिय और चर्चित लोगों को लोकसभा के जरिए ही एंट्री कराई जाती है।
(3) सूत्र बताते हैं कि राज्य सभा टिकट पाने की होड़ के चलते आम आदमी पार्टी के अंदर ही गुटबाजी शुरु हो गई थी। पार्टी फोरम पर हर नेता को टिकट दिलाने के लिये कुछ लोग खड़े हो जाते। एकबारगी लगा कि हर नेता दूसरे को काट रहा है। इस मसले पर जबरस्त घमासान मचता देख पार्टी ने किसी भी विवादित नाम को लेने की जगह ऐसे दो नाम चुने जिसके पक्ष में भले ही कम लोग हों लेकिन, गुटबाजी न हो।
(4) कुमार विश्वास को टिकट न दिए जाने पर सबसे ज्यादा विवाद हो रहा है जबकि मीडिया में अपनी मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़ आप में आए पूर्व पत्रकार आशुतोष को भी राज्य सभा का टिकट नहीं मिला। इसके बावजूद आशुतोष ने पार्टी के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और संजय सिंह के साथ नॉमिनेशन फाइल करने के लिए होने वाली रैली में भी शामिल हुए। जबकि कुमार विश्वास ने सार्वजनिक तौर पर इस फैसले पर सवाल खड़ा कर दिया।