फरीदाबाद शहर को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। इसके बावजूद लोग नशे को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। ताजा मामलों में ये सामने आया है कि जिन दवाओं को नशा छुडाने के लिए बनाया गया है युवा उन्ही दवाओं का इस्तेमाल नशा करने में कर रहे हैं। इसमें नशे की गोलियों से लेकर इंजेक्शन तक शामिल हैं। ये सभी वे ड्रग हैं जिन्हे डॉक्टर की पर्ची के बिना किसी भी मेडिकल स्टोर से नहीं खरीदा जा सकता। इसलिए इनकी कालाबाजारी कर नशे के सौदागर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
नशेड़ियों की लत: नशा छुड़ाने वाली दवाओं से ही नशा कर रहे युवा, इंजेक्शन से लेकर गोली तक सभी का हो रहा इस्तेमाल
पुलिस लगातार अवैध शराब बेचने वाले या गांजा बेचने वालों के खिलाफ केस दर्ज कर रही है। शराब को तस्करी के अलावा ठेकों से आसानी से खरीदा जा सकता है इसलिए उसकी डिमांड केवल सस्ते रेट को लेकर ही रहती है। नशीली दवाओं को आसानी से बाजार से नहीं लिया जा सकता, इसके चलते उनकी मांग भी ज्यादा है और मुनाफा भी।
खुशनुमा माहौल बनाने और डांस करने के लिए भी गोली उपलब्ध
सेक्टर 11 निवासी डॉ. संजीव गोदारा कई सालों से नशे पर काम कर रहे हैं। उन्होने बताया अलग-अलग तरह का नशा शरीर पर अलग तरीका का प्रभाव डालता है। कई ड्रग ऐसे हैं जिनका इस्तेमाल इलाज के लिए करने के बजाय लोग नशा करने के लिए कर रहे हैं। इन दिनों एक गोली काफी चलन में है। इसे डिप्रेशन के रोगियों के इलाज के लिए बनाया गया था। इसके सेवन से रोगी खुशनुमा माहोल का अनुभव करता है। इसकी एक चौथाई से भी कम मात्रा रोगी को दी जाती है।
आजकल इसका इस्तेमाल लोग नशा करने में कर रहे हैं। इसकी ज्यादा मात्रा लेकर लोग डांस करते हैं। इससे थकान नहीं होती, सेवन करने वाला खुश दिखाई देता है। जरा से म्यूजिक पर भी थिरकने के मन करता है। जैसे ही दवा का असर कम होता है थकान महसूस होती है और लोग इसकी मांग दोबारा से करते हैं। फिर इसकी आदत लग जाती है। एक गोली दो से ढाई हजार में बिकती है। कुछ इंजेक्शन ऐसे हैं जिन्हे मनोरोगियों के इलाज के लिए बनाया गया है। इसका इस्तेमाल लोग नशे के लिए कर रहें हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन खतरनाक है।
पेन किलर व रिजला कागज आसानी से उपलब्ध
बाजार में कई पेन किलर ऐसे हैं जिन्हे आसानी से खरीदा जा सकता है। इसकी मात्रा बढ़ाकर नशे में इस्तेमाल हो रही है। इनके सामान्य सेवन से नींद आती है। नशा मुक्ती केंद्र में नशेड़ियों को कुछ दवाइयां दी जाती हैं जिससे उनकी तलब थोड़ी कम हो जाती है। नशे को आदि लोगों को नशा नहीं मिलने पर अपने हाथ या पैर को खाना शुरू कर देते हैं। नशेड़ी टेबलेट के साथ दी जाने वाली अन्य दवाओं को फेंक देते हैं और तलब मिटाने वाली दवा के आदि हो रहे हैं। रिजला पेपर आसानी से पनवाड़ी की दुकानों पर मिल जाता है। इसका इस्तेमाल लोग गांजा और तम्बाकू मिलाकर पीने के लिए कर रहे हैं।
(नोट- लोगों को नशे से बचाने के लिए दवाओं के नाम नहीं लिखे गए हैं।)
900 केस दर्ज कर 830 से ज्यादा आरोपी दबोचे
पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाने के आदेश दे रखे हैं। जनवरी से अब तक पुलिस ने 650 से ज्यादा एक्साईज एक्ट और करीब 250 एनडीपीएस एक्ट के केस दर्ज कर 830 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये अभियान लगातार जारी है। पुलिस आयुक्त ने हाल ही में सभी क्राइम ब्रांच को मेडिकल स्टोर संचालकों की जांच के निर्देश दिए हैं।