निकिता हत्याकांड में शुक्रवार को भले ही फैसला आ गया हो, लेकिन निकिता को इंसाफ दिलाने के लिए सड़क पर उतरे एक हजार लोगों के खिलाफ अब भी मामला दर्ज है। इसमें से 28 लोग गिरफ्तार होकर जेल भी जा चुके हैं। हालांकि फिलहाल सभी जमानत पर बाहर हैं। जमानत के बाद भी उनका केस अदालत में विचाराधीन है।
निकिता हत्याकांड: एक हजार लोगों पर दर्ज है एफआईआर, 28 जमानत पर, अन्य की तलाश में आज भी पुलिस
फैसले के लिए उनके परिजन आज भी अदालत के चक्कर लगा रहे हैं। बाकी लोगों की अभी पुलिस को तलाश है। 26 अक्तूबर को बल्लभगढ़ के अग्रवाल कॉलेज के सामने तौसीफ ने अपने दोस्त रेहान के साथ मिलकर सोहना रोड स्थित अपना घर सोसाइटी निवासी निकिता तोमर की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
27 अक्तूबर को निकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उसके परिजनों व कुछ सामाजिक संगठनों के बैनर तले जुटे सैकड़ों लोगों ने दिल्ली मथुरा हाईवे को जाम कर दिया था। करीब पांच घंटे तक जाम के बाद अतिरिक्त उपायुक्त व एसडीएम के आश्वासन के बाद लोगों ने जाम खोला। इस मामले में थाना शहर पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने के आरोप में 500 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
इसके बाद एक नवंबर को दशहरा मैदान में आयोजित महापंचायत के दौरान लोग उग्र हो गए और राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और उन्होंने सड़क पर आगजनी व तोड़फोड़ करते हुए पुलिस पर पथराव कर दिया। इस मामले में भी थाना शहर पुलिस ने 500 से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसमें से 28 लोगों को मौके से ही काबू करते हुए जेल भेज दिया, जबकि अन्य की आज भी तलाश जारी है।
अभियोजन पक्ष ने अनावश्यक गवाहों को चार्जशीट में शामिल किया। इस कारण पांच माह में केस पूरा हुआ। मुख्य गवाहों के आधार पर केस लड़ा जाता तो पांच महीने से पहले ही मामले में सुनवाई पूरी होती। - पीके गोयल, बचाव पक्ष के वकील
हाईकोर्ट में अपील करेंगे
हाईकोर्ट में अपील करेंगे । इसमें दोषियों को राहत मिलेगी। प्रयास है कि एक साल बाद ही दोषियों को पैरोल मिल जाए। वह अपने स्वभाव अनुसार जेल में भी अच्छे व्यवहार के लिए जाने जाएंगे। -अनीस खान, बचाव पक्ष के वकील
फांसी की सजा से समाज में कड़ा संदेश जाता। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन आगे भी लड़ाई जारी रखेंगे। - ऐदल रावत, अभियोजन पक्ष के वकील