छात्रा निकिता तोमर हत्याकांड मामले में शुक्रवार को फास्ट ट्रेक कोर्ट के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुईं थीं। कोर्ट परिसर लोगों से खचाखच भरा हुआ था। कुछ निकिता पक्ष के लोग तो कुछ दोषी तौसीफ और रेहान के संबंधी थे। उधर दोनों पक्षों के वकील के अलावा ऐसे लोग भी कोर्ट परिसर में मौजूद थे जो केवल यह जानना चाहते थे कि आखिर फास्ट ट्रेक कोर्ट का फैसला क्या रहा। इसके लिए तीन बार लोग न्यायधीश सरताज बसवाना के जजमेंट रूम के बाहर जमा हुए। आखिर में शाम चार बजकर एक मिनट पर दोनों दोषियों को उम्रकैद व 28 हजार रुपये जुर्माने की सजा अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश ने सुनाई।
निकिता हत्याकांड: लोगों से भरा रहा कोर्ट परिसर, शाम 4.01 बजे आया फैसला, फिर आक्रोश में बाहर...
26 अक्तूबर 2020 को घटित हुए निकिता हत्याकांड में पूरे पांच माह बाद फास्ट ट्रेक कोर्ट का फैसला आया। बहुचर्चित मामले के फैसले को लेकर शुक्रवार सुबह ग्यारह बजे दोनों दोषियों तौसीफ और रेहान को कोर्ट में लाया गया। यहां दोनों पक्षों की तरफ से छह अधिवक्ताओं ने करीब आधे घंटे तक सजा को लेकर बहस की। इसमें अभियोजन पक्ष ने फैसले के लिए हुई अंतिम बहस में अपनी बात रखते हुए कहा कि कॉलेज के सामने दिन दहाड़े छात्रा को गोली मारने को बेहद शर्मनाक बताया।
संवेदनाओं और समाज में एक ठोस संदेश देने के लिए 11 से साढ़े ग्यारह बजे तक करीब आधे घंटे बहस हुई। इसमें बचाव पक्ष ने वारदात को सिंग्ल बुलेट फायर में नॉन वाइटल पार्ट पर इंजरी (शरीर का गैर महत्वपूर्णं हिस्सा) बताकर सामान्य घटना करार दिया। इसमें रेयरेस्ट ऑफ द रेयर (दुर्लभ मामले) केस के बराबर फांसी की सजा नहीं देने की बात रखी। बचाव पक्ष ने लगभग 12 ऐसे मामलों का हवाला कोर्ट में दिया। इसमें सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को शामिल किया। इन फैसलों का हवाला देते हुए निकिता हत्याकांड को दुर्लभ मामला न मानने की अपील करते हुए दोषियों के गैर क्रिमिनल बैकग्राउंड का हवाला दिया।
वहीं, कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसले के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे तक कार्रवाई स्थगित कर दी। दोपहर बाद करीब तीन बजे लोग न्यायधीश सरताज बसवाना के कार्ट के बाहर जमा होने शुरु हो गए। इसमें अभियोजन व बचाव पक्ष के लोग व अन्य लोग शामिल रहे। तौसिफ के परिजनों में उसकी फूफी, बहन असमीना व कुछ अन्य रिश्तेदार भी मौके पर मौजूद रहे। वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से निकिता के मामा ऐदल सिंह रावत, पिता मूलचंद तोमर व अन्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान कॉलेज के कुछ युवा सहित कुछ सामाजिक लोग भी मौके पर मौजूद रहे। न्यायधीश ने फैसले के लिए दोपहर साढ़े तीन बजे का समय बदलकर शाम चार बजे रखा।
इसके बाद मौके पर मौजूद मीडिया कर्मी व लोगों को कोर्ट रूम के अंदर आने की इजाजत दी। शाम चार बजकर एक मिनट पर न्यायाधीश सरताज बसवाना ने अपना फैंसला सुनाते हुए दोषी तौसीफ को धारा 302 व 34 के तहत उम्र कैद व बीस हजार रुपये जुर्माना, धारा 366 व 511 में पांच साल कैद दो हजार जुर्माना, धारा 27 आर्म्स एक्ट में चार साल कैद दो हजार जुर्माना व धारा 120 बी में पांच वर्ष कैद के साथ दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोषी रेहान पर 27 आर्म्स एक्ट के अलावा बाकी सभी धाराओं में तौसीफ के बराबर का दोषी मानते हुए उम्र कैद व 26 हजार जुर्माना की सजा सुनाई है।