हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा की परीक्षाएं भी गुरुवार से शुरू हो गई। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग द्वारा नकल रहित परीक्षा कराने के दावों पर नकलची पानी फेरते दिखे। इंतजामों को धता बताकर लोग परीक्षा केंद्रों की छतों पर रस्सियों के सहारे चढ़ गए। वहां से उन्होंने कक्षाओं में खूब पर्चियां फेंकी। परीक्षा केंद्रों की खिड़कियों और दीवारों पर भी लोग चढ़े दिखे। पुलिसकर्मी नकल फेंकने वालों को भगाने का पूरा प्रयास करते रहे, लेकिन वे नहीं माने। पुलिस कर्मी इधर से भगाते तो वे दूसरी तरफ पहुंच जाते। जिला शिक्षा विभाग व प्रशासन के उड़नदस्तों ने केेंद्रों पर छापा मारकर 87 छात्रों को नकल करते हुए पकड़ा। उनके खिलाफ यूएमसी बनाई गई।
जान जोखिम में डालकर कराई नकल: रस्सियों के सहारे चढ़े, छत से कक्षाओं में फेंकीं पर्चियां
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10वीं कक्षा का गुरुवार को सामाजिक अध्ययन का पेपर था। दोपहर 12.30 बजे शुरू हुआ। परीक्षार्थियों को 12 बजे से ही परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश कराना शुरू कर दिया। हॉल के अंदर प्रवेश कराने से पहले परीक्षार्थियों की पूरी तरह से जांच की गई। जांच के बाद ही हॉल के अंदर पेपर देने के लिए प्रवेश दिया गया।
परीक्षा केंद्रों के बाहर सुरक्षा को लेकर तथा शांतिपूर्ण तरीके से पेपर कराने के लिए भारी पुलिस बल मौजूद था। हर केंद्र पर 8 से 10 पुलिस कर्मी तैनात थे। परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लगाई गई थी, लेकिन उसके बावजूद काफी लोग 200 मीटर के दायरे के अंदर ही घूमते देखे गए। पेपर समाप्त होने तक अभिभावक परीक्षा केंद्रों के आसपास डटे रहे।
72 केंद्रों पर हुई परीक्षा
जिले में कक्षा 10वीं का सामाजिक अध्ययन का पेपर 72 परीक्षा केंद्रों पर हुआ। इनमें पलवल में 36, होडल में 26 तथा हथीन उपमंडल में 10 परीक्षा केंद्र पर पेपर कराया गया। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा इन परीक्षा केंद्रों में से जेएस मेमोरियल स्कूल गौड़ोता तथा एसजी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय असावटा मोड़ को संवेदनशील परीक्षा केंद्र घोषित किया गया। उसके अलावा हथीन में भी कई परीक्षा केंद्र संवेदनशील घोषित किए गए थे। इन सभी संवेदनशील व अति संवेदनशील केंद्रों पर पुलिस सुरक्षा ज्यादा थी। इनके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के केंद्रों पर भी पुलिस व्यवस्था सख्त थी, लेकिन उसके बावजूद नकल खूब हुई।
जान जोखिम में डालकर कराई नकल
जिले में कुछ परीक्षा केंद्रों पर तो नकल फेंकने वालों को अपनी जान तक की परवाह नहीं थी। युवक रस्सियों के सहारे केंद्र की छतों पर चढ़कर नकल फेंकते रहे। बार-बार रस्सियों के सहारे छत पर चढ़ते तथा बार-बार नीचे उतरते। उन्हें तो केवल नकल फेंकनी थी। जहां कुछ युवक नकल फेंक रहे थे। वहीं, केंद्रों के पास पेड़ों की छांव में बैठकर कुछ युवक पर्चियां तैयार करने में लगे रहे। कुछ परीक्षा केंद्रों के अंदर भी सुपरवाइजर व अन्य स्टाफ नकल कराता रहा।