टोक्यो पैराओलंपिक में शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाले मनीष नरवाल और दोहरे पदक जीतकर इतिहास रचने वाले सिंहराज अधाना के स्वागत में शुक्रवार को बदरपुर बार्डर पर शहरवासी उमड़ पड़े। गाड़ी में खड़े होकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते सिंहराज और मनीष को काफिले के साथ उनके घर लाया गया। इससे पहले लोग उनकी अगवानी में सड़कों पर निकल पड़े। इससे कई जगह जाम के हालात बन गए।
फरीदाबादः ओलंपियन मनीष और सिंहराज के भव्य स्वागत में उमडे़ शहरवासी
मां संतोष ने मिठाई खिलाकर बेटे मनीष का मुंह मीठा करवाया। लोग तिरंगा झंडा लेकर उनके काफिले में शामिल हुए और नाचते हुए आगे बढ़ते रहे। मनीष की मां और परिवार के अन्य लोग भी ढोल की थाप पर जमकर नाचे।
बदरपुर बार्डर पर मेले का सा माहौल दिखा
मां संतोष ने मिठाई खिलाकर मनीष का मुंह मीठा करवाया। लोग तिरंगा झंडा लेकर उनके काफिले में शामिल हुए और नाचते हुए आगे बढ़ते रहे। सिंहराज और मनीष के परिवार के लोग भी ढोल की थाप पर जमकर नाचे। बदरपुर बार्डर पर मेले का सा माहौल दिखा। जगह- जगह लोग दोनों खिलाड़ियों को माला और पगड़ी पहनाने के इंतजार में खड़े दिखे। ऐसा स्वागत देखकर सिंहराज व मनीष अभिभूत हो उठे। उन्होंने लोगों के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए सिर झुकाकर उनका अभिवादन किया।
दोनों खिलाड़ियों ने शूटिंग में दिखाया दम
मनीष ने पुरुषों की 50 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मनीष मूलरूप से सोनीपत के हैं, जो कई वर्षों से फरीदाबाद में रह रहे हैं और अब यही उनका स्थाई निवास है। वहीं, सिंहराज अधाना ने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा एसएच-1 के फाइनल मुकाबले में कांस्य पदक जीतने के बाद 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा एसएच-1 में रजत पदक जीता था। दो पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया था।
सिंहराज ने आर्थिक परेशानियों और कोरोना की दूसरी लहर का माहौल व खुद कोरोना संक्रमित होते हुए भी अपना संघर्ष जारी रखा और देश के लिए दो मेडल लेकर आए। अधाना मूलरूप से फरीदाबाद के तिगांव निवासी हैं। मौजूदा समय में उनका संयुक्त परिवार बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव में रहता है।
फुटबॉलर बनना चाहते थे नरवाल
मनीष नरवाल फुटबॉलर बनना चाहते थे, लेकिन दिव्यांगता की चुनौतियां थी, मगर ये चुनौतियां मनीष के एथलीट बनने के इरादे को डिगा नहीं सकी। मनीष ने पिता और सहयोगियों की सलाह पर 2016 में शूटिंग में करियर बनाने का फैसला किया। नरवाल ने फरीदाबाद में शूटिंग करनी शुरू की। इसके बाद न्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। नरवाल कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में जीत हासिल कर चुके हैं।
टोक्यो जाने से पहले प्रधानमंत्री से कही थी ये बात
सिंहराज मानते हैं कि सरकारी मदद से हौसले बढ़ते हैं और यही बात उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कही थी। उन्होंने प्रधानमंत्री से जापान जाने से पहले हुई छह मिनट की बातचीत में कहा था कि शूटिंग एक ऐसा खेल है जिसमें पैसा एक बड़ी समस्या है। शूटिंग के अभ्यास में भी काफी पैसा खर्च होता है। ऐसे में अगर खिलाड़ियों को सरकार से मदद मिलती रहती है तो उनका हौसला भी बढ़ता रहता है।