फरीदाबाद में 17वीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने वाला 10वीं का छात्र गौरव कितने दर्द में जी रहा था, उसके कमरे में मिल रही डायरियां और नोट्स बयां कर रहे हैं। जिस तरह उसे परेशान किया जाता था और कैसे वह झेल रहा था, इन सबके बारे में लिखे एक-एक शब्द हर किसी के मन को कचोट रहे हैं। हर कोई अपने साथ के दोस्तों से अपनी समस्या को साझा करने की कोशिश करता है।
फरीदाबाद छात्र सुसाइड केस: डायरी खोल रही राज, कितने दर्द में जी रहा था गौरव, एक-एक पन्ना पढ़ फफक पड़ती है मां
डीपीएस का छात्र डिस्कवरी सोसायटी निवासी गौरव (बदला हुआ नाम) ने 23 और 24 फरवरी की रात सोसायटी की 17वीं मंजिल से छलांग लगा कर अपनी जान दे दी थी। दरअसल 23 फरवरी को गौरव की विज्ञान की परीक्षा थी। आरोप है कि उसने अपनी प्रधानाध्यापिका से कुछ प्रश्न समझने के लिए मदद मांगी थी।
प्रधानाध्यापिका ने यह कहते हुए उसे डांट लगाई थी कि वह बीमारी का बहाना बना कर फायदा उठा रहा है। इसके कारण गौरव इतना परेशान हो गया कि उसने यह कदम उठाया। मामले में बीपीटीपी थाना पुलिस ने प्रधानाध्यापिका और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।
डायरी और नोटबुक्स में बयां करता रहा अपने दर्द
गौरव को लगने लगा था कि उसे इस दुनिया में समझने वाला कोई नहीं है। इसलिए उसने डायरी और नोट बुक्स को अपनी जिंदगी का जरिया बना लिया। उसने उसमें वह सब कुछ लिखा है जो वह किसी से नहीं कह पाता था। डायरी में लिखी उसकी एलियन कविता को पढ़ कर लगता है कि उसे आम बच्चों की श्रेणी में नहीं शामिल किया जाता है। वह जैसा भी है उसमें उसकी क्या गलती है। गौरव के कमरे में दीवारों पर उकेरे गए कला के रंग यह बता रहे थे कि वह कूची से अपना अलग संसार रच रहा था।
लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद होने के कारण सुकून में था गौरव
गौरव की मां ने बताया कि उसके साथ सेक्शुअल असॉल्ट की घटना मार्च 2020 में लॉकडाउन से पहले हुई थी। लेकिन उसने इस बात को छुपाए रखा। यही वजह रही कि वह अवशाद में चला गया। लॉकडाउन में जब स्कूल बंद हुए तो उसे काफी सुकून मिलने लगा। धीरे-धीरे सामान्य भी हो रहा था। सालभर की काउंसलिंग के बाद उसने अपनी मां को सेक्शुअल असॉल्ट के बारे में बताया था। पड़ोसियों का कहना है कि गौरव कभी स्कूल नहीं जाना चाहता था। जब स्कूल खुल रहे थे तो उसने कहा कि वह स्कूल में चिढ़ाने वाले छात्रों का सामना नहीं कर पाएगा।
स्कूल में चिढ़ाए जाने और परेशान करने के बावजूद लड़ रहा था गौरव
स्कूल में उसके साथ वॉशरूम में कुछ छात्रों द्वारा गलत काम करने के लिए मजबूर किया गया। विरोध करने पर उसकी पैंट तक उतार दी गई थी। किसी को बताने पर धमकी भी दी गई। गौरव को इस बात को लेकर भी दुख था कि उसके कारण ही उसके मां-बाप के बीच तलाक हुआ है। परिजनों का कहना है कि उसकी बीमारी डिसलेक्सिया का मजाक उड़ाया जाता था। समलैंगिता को लेकर उसे चिढ़ाया जाता था। रिश्तेदारों का कहना है कि वह उन्हें कॉल करता था और कहता कि उसे नहीं पता है कि समलैंगिता क्या है। वह इन सबसे लड़ रहा था।
10वीं के छात्र गौरव के साथ जो हुआ वह गलत हुआ। ऐसे बच्चों को काफी ध्यान देने की जरूरत होती है। वह काफी संवेदनशील होते हैं। ऐसे बच्चों को चिढ़ाने या परेशान करने से उनका व्यक्तित्व कमजोर हो जाता है। स्कूल के साथ-साथ घर पर भी परिवार के लोगों को समझने की जरूरत होती है।-रोहित गुप्ता, न्यूरॉलोजिस्ट, फोर्टिस अस्पताल