दशहरे को लेकर देशभर में रावण दहन की धूम है। अलग-अलग जगह नए-नए तरीके से रावण के पुतले बनाकर समाज में संदेश दिया जा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में रावण का एक ऐसा पुतला सामने आया है, जिसके पीछे की सच्चाई जानने के बाद शायद उसे जलाने वालों के हाथ भी कांपने लगें।
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किताबों से बना रावण का पुतला
- फोटो : अमर उजाला
हाथरस में रावण दहन के लिए विशाल पुतला बनाया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पुतला सरकारी स्कूल के बच्चों के बीच नि:शुल्क वितरित की जाने वाली एनसीईआरटी की किताबों के पन्नों को फाड़ कर बनाया गया है। रावण के पुतले पर सवाल-जवाब से भरे पन्नों को साफ देखा जा सकता है।
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किताबों से बना रावण का पुतला
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विजयदशमी की दोपहर जब इसकी भनक कांग्रेस के नेताओं को लगी तो वह पॉलिटेक्निक मैदान पर पहुंच कर प्रदर्शन करने लगे। मामले की गंभीरता को समझते हुए सुरक्षा की दृष्टि से एडीएम अशोक कुमार शुक्ला भी मौके पर पहुंचे।
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किताबों से बना रावण का पुतला
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इसके बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। मौके पर पहुंचे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का कहना था कि योगी सरकार में शिक्षा माफियाओं का खेल खुलकर सामने आ गया है। जो किताबें बच्चों के हाथ में होनी चाहिए थीं, उनका इस्तेमाल रावण का पुतला बनाने में किया जा रहा है। ठेकेदार का कहना था कि उसने यह किताबें अलीगढ़ में मदार गेट से रद्दी के रूप में खरीदी हैं।
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किताबों से बना रावण का पुतला
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वहीं एडीएम ने पूरे मामले को लेकर कहा कि यह गंभीर मुद्दा है। यह किताबें कहां से आईं, इसकी जांच की जा रही है। हालांकि अब प्रशासन के सामने यह बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि रावण के पुतले का दहन कैेसे होगा।