आम आदमी पार्टी (आप) बेशक दिल्ली पुलिस की छापेमारी को सियासी साजिश का हिस्सा बता रही है, लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्टाफ की तरफ से सहयोग न मिलने पर उन्हें मुख्यमंत्री आवास जाना पड़ा। जांच को आगे बढ़ाने के लिए सीसीटीवी फुटेज की दरकार थी। (सभी फोटो- हिमांशु सोनी)
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delhi chief secretary case
- फोटो : himanshu soni
इसकी मांग भी तीन दिन पहले पीडब्ल्यूडी से की गई। लेकिन शुक्रवार को उन्हें फुटेज नहीं मिला। जबकि मीडिया में लीक किए गए फुटेज में छेड़छाड़ की आशंका दिख रही थी। इसी वजह से पुलिस टीम ने छापेमारी की।
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पुलिस सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार वीके जैन के 164 के बयान से साफ हो गया है कि मुख्य सचिव के साथ रात करीब 12 बजे मारपीट की गई। इस मामले में मुख्य सचिव ने पहले ही मामला दर्ज करा रखा है। पुलिस को अब जांच आगे बढ़ानी थी। इसके लिए घटनास्थल से जुड़े सबूतों की जरूरत थी। इसमें सबसे अहम सीसीटीवी फुटेज था। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि तीन दिन पहले कैमरा लगाने वाली एजेंसी पीडब्ल्यूडी से मुख्यमंत्री आवास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व डीवीआर मांगी गई थी। लेकिन छापेमारी के पहले तक इसे मुहैया नहीं कराया गया है। इसकी जगह फुटेज मीडिया में जारी कर दी गई। इससे यह साबित करने की कोशिश की गई कि अंशु प्रकाश की शिकायत झूठी है।
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सीसीटीवी फुटेज में मुख्य सचिव के मुख्यमंत्री आवास से निकलने का वक्त करीब 11:38 बजे थे, जबकि एमएलसी रिपोर्ट में मुख्य सचिव को चोट लगने की बात मध्य रात्रि 12 बजे के बाद बताई गई है।
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सूत्र बताते हैं कि वीके जैन के बयान के बाद फुटेज अहम सबूत हो सकता है। लेकिन इसे पुलिस को नहीं दिया जा रहा था। सीसीटीवी फुटेज हासिल करने के लिए दिल्ली पुलिस को छापा मारना पड़ा। इसमें कोई सियासत नहीं है। वारदात स्थल का मुआयना करना जांच अधिकारी का कर्तव्य भी है और बगैर इसके जांच आगे बढ़ नहीं सकती।