देश को कॉमनवेल्थ खेलों में 12वां गोल्ड जिताने वाली श्रेयसी का नाम सबकी जुबां पर है। अपनी ऑस्टेलियाई प्रतिस्पर्धी एमा कॉक्स को जबरदस्त टक्कर देकर जिस स्वर्ण पदक को श्रेयसी ने जीता है वह न सिर्फ देश के लिए बल्कि खुद श्रेयसी के लिए निजी तौर पर भी बेहद महत्वपूर्ण है। गोल्ड कोस्ट में श्रेयसी एक वादा लेकर पहुंची थी और गोल्ड जीतने के बाद वह अपने वादे को निभा सकी हैं।
26 साल की श्रेयसी के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है जिसे शायद ही वो कभी भूल सकें। उन्होंने खुद से और देशवासियों से किया वादा पूरा कर लिया है। गौरतलब है कि साल 2010 में श्रेयसी के लिए काफी खराब रहा था। उसी साल जून में ब्रेन हैमरेज से उनके पिता दिग्विजय सिंह की लंदन में मृत्यु हो गई थी।
वह 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। लेकिन उन्होंने उसी साल फरवरी में हुए दिल्ली कॉमनवेल्थ फेडरेशन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था।
2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में श्रेयसी ने सिल्वर जरूर जीता था लेकिन वह अपने प्रदर्शन से इतनी खुश नहीं थीं। उस वक्त श्रेयसी ने कहा था कि उन्होंने सिल्वर जीता नहीं है बल्कि गोल्ड गंवाया है। उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था कि अगले राष्ट्रमंडल खेलों में वह गोल्ड जीतेंगी। और आज की शूट ऑफ में जीत के बाद उनका सपना पूरा हो चुका है।
गोल्ड जीतने के बाद जब श्रेयसी से पूछा गया कि अब उनका अगला टारगेट क्या है तो वो बोलीं अगला टारगेट परसों होने वाला ट्रैप इवेंट है, जिसमें वो एक और गोल्ड जीतना चाहती हैं। वहीं इसके बाद उनकी निगाहें टोक्यो पर होंगी। अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गोल्ड दिलाने वाली 26 साल की श्रेयसी का पूरा पारिवारिक बैकग्राउंड ही निशानेबाजों का रहा है। श्रेयसी के दादा कुमार सुरेंद्र सिंह और पिता दिग्विजय सिंह दोनों ही अपने समय में राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं। यही नहीं दिग्विजय सिंह तो 5 बार सांसद रह चुके हैं।