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सोशल मीडिया के जरिए आपके बैंक खाते को किया जा रहा हैक, नहीं जानते तों पढ़ लें ये खबर

Sat, 22 Oct 2016 12:04 AM IST
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा Updated Sat, 22 Oct 2016 12:04 AM IST
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bank accounts can be hacked by social media and can be misused

अगर आपके खाते से 10, 20 या 50 रुपये तक की छोटी रकम की निकासी होती है तो आप इसकी छानबीन बैंक से जरूर करें। हो सकता है कि यह हैकरों का ‘सलामी अटैक’ हो। बाद में वह खाते से बड़ी निकासी कर ‘सुनामी’ भी ला सकते हैं। यूपी एसटीएफ के एएसपी, साइबर क्राइम डॉ. त्रिवेणी सिंह की मानें तो छोटी रकम की चोरी छिपे या धोखे से निकासी (सलामी अटैक) कर हैकर टेस्ट करते हैं। वह यह कंफर्म करते हैं कि अमुक खाते से वह जब चाहें रकम निकाल सकते हैं। इसके बाद वह भविष्य में किसी बड़े ट्रांजेक्शन को अंजाम देते हैं। यही वजह है कि छोटी से छोटी रकम की निकासी के बाद भी एक्सपर्ट उसकी छानबीन की सलाह देते हैं ताकि ग्राहक संतुष्ट हो जाए कि अमुक ट्रांजेक्शन सही मद में हुआ है। 

bank accounts can be hacked by social media and can be misused
दरअसल, बीते दिनों लाखों डेबिट कार्डधारकों के डाटा लीक होने के बाद खुद बैंक भी उनको सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं। वहीं बैंक खुद भी ग्राहकों के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। हालांकि बैंक के सूत्रों के मुताबिक यह डाटा बैंक और ग्राहक के बीच की थर्ड पार्टी से लीक होने की संभावना जताई जा रही है। साइबर मामलों के जानकारों की मानें तो थर्ड पार्टी के साथ हाथ मिलाने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वहां ग्राहकों का डाटा सुरक्षित रहेगा। यही नहीं सुरक्षा के अन्य आयामों पर भी निगरानी होनी चाहिए। इसमें तकनीकी और फॉरेंसिक सहित एटीएम टेक्नोलॉजी की जानकारी रखने वाले एक्सपर्ट भी शामिल हों ताकि इनके मंसूबों पर पहले से ही पानी फेरा जा सके।
bank accounts can be hacked by social media and can be misused
ग्रेबिट वायरस ने मचाया था कहर
बता दें कि बीते कुछ साल पहले ग्रेबिट नामक एक वायरस ने कई कंपनियों की हजारों फाइलें और डाटा चुरा लिया था। हालांकि यह एक उदाहरण मात्र है। ऐसे ही न जाने कितने तरीके से आपके सोशल मीडिया से लेकर बैंक अकाउंट और अन्य सूचनाओं पर हैकरों का हमला होता आ रहा है।
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ऐसे होता है हमला
वायरस हमला आपके ईमेल पर होता है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट वर्ड की फाइल अटैच होती है। इसके अलावा वायरस इमेज, ग्रीटिंग कार्ड या ऑडियो और वीडियो फाइलों के जरिये भी कंप्यूटर में वायरस आता है। इसको डाउनलोड करते ही वायरस सक्रिय हो जाता है और सारी सूचनाएं हैकरों तक पहुंचाना शुरू कर देता है। साइबर अटैक के तहत डेबिट और क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर, सीवीवी कोड या सोशल नेटवर्किंग साइट की हैकिंग की जाती है। इसके अलावा सीधे मदरबोर्ड पर अटैक कर फीड डाटा चोरी किया जाता है।
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- फोटो : SOCIAL MEDIA
इससे बचना चाहिए
ईमेल पर आए लुभावने और भड़कीले विज्ञापन, आकर्षक उपहारों का ऑफर, इनामी योजनाओं के ऑफर से बचना चाहिए। चूंकि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाला इसकी बारीकियों को नहीं जानता और आसानी से फंस जाता है। इसके अलावा एटीएम का पिन भी समय समय पर बदलते रहना चाहिए ताकि कार्ड क्लोनिंग की हालत में साइबर अपराधी उसका उपयोग न कर पाएं।
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