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कहां है बुलंदशहर हिंसा में मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध सिंह का ड्राइवर और क्यों साध रखी है चुप्पी

Fri, 07 Dec 2018 05:28 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Fri, 07 Dec 2018 05:28 PM IST
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bulandshahr violence: why driver ram aasre of inspector subodh kumar is silent on his death
inspector subodh kumar - फोटो : अमर उजाला

'हम कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं, सर'। राम आसरे ने शुक्रवार सुबह बीबीसी को बुलंदशहर से फोन पर बताया। हमारा अगला सवाल था, 'इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के आखिरी पलों में क्या हुआ था?' जवाब मिला, 'हम ये नहीं कह सकते सर क्योंकि आखिरी समय पर हम वहां मौजूद नहीं थे।' इसके बाद स्याना पुलिस थाने के एसएचओ सुबोध कुमार सिंह के आधिकारिक ड्राइवर राम आसरे ने इस बात की पुष्टि की कि, वे कानपुर के रहने वाले हैं और डेढ़ साल से स्याना कोतवाली में पोस्टेड हैं।

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inspector subodh kumar - फोटो : अमर उजाला

'उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी करते हुए 32 साल हो गए हैं', इतना कहते ही राम आसरे ने फोन काट दिया। राम आसरे ने इस बात का जवाब नहीं दिया कि वे ड्यूटी पर क्यों नहीं आ रहे या कहां पर मौजूद हैं।

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Subodh Kumar Rathore

कौन हैं राम आसरे?

बुलंदशहर में सोमवार को हुई भीड़ की हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और सुमित नाम के एक स्थानीय युवक की मौत हो गई थी। ये हिंसा तब भड़की जब स्थानीय हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने इलाके में कथित गोकशी के नाम पर प्रदर्शन कर रहे थे। 

पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध की मौत हो गई। प्रदर्शनकारी सुमित भी गोली लगने के बाद मारे गए थे। हिंसा के कुछ घंटे बाद सुबोध कुमार सिंह के ड्राइवर राम आसरे ने आला पुलिस अफसरों की मौजूदगी में कुछ वीडियो बयान दिए थे।

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subodh

क्या कहा था राम आसरे ने?

'हम बचने के लिए सरकारी गाड़ी की ओर दौड़े। साहब को ईंट से चोट लगी थी और वह दीवार के पास पड़े थे। मैंने उन्हें गाड़ी की पिछली सीट पर बिठाया और जीप को खेतों की ओर घुमाया। भीड़ ने हमारा पीछा किया और पुलिस स्टेशन से लगभग 50 मीटर दूर खेतों में फिर से हमला कर दिया।'

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INSPECTOR SUBODH - फोटो : SELF

भीड़ ने दोबारा हमला किया

उन्होंने आगे बताया था कि, 'खेत को हाल ही में जोता गया था। ऐसे में गाड़ी के अगले पहिये फंस गए और हमारे पास गाड़ी से निकलकर भागने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था। भीड़ गाली दे रही थी और हमें जान से मारना चाहती थी।' उस दिन के बाद से राम आसरे ने अपनी जुबान पर ताला लगा लिया है।

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