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देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री के बाद इन 7 वजहों से CBI जांच पर उठे थे सवाल

Fri, 13 Oct 2017 11:30 AM IST
विनीत खरे/बीबीसी संवाददाता
विनीत खरे/बीबीसी संवाददाता Updated Fri, 13 Oct 2017 11:30 AM IST
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arushi hemraj murder case and seven faults in cbi investigation

साल 2008 के आरुषि-हेमराज हत्याकांड में अदालत बच्ची के माता-पिता, नूपुर और राजेश तलवार को दोषी करार दे चुकी है लेकिन आज इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले पर एक महत्वपूर्ण फैसला देने वाली है। हालांकि, कई लोगों के लिए अब भी हत्या का रहस्य बरकरार है। 16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के एक घर में 14 साल की आरुषि का शव मिला था। अगले दिन घर में काम करने वाले हेमराज का शव घर की छत पर मिला। शुरुआत में उत्तर प्रदेश पुलिस ने केस सुलझाने का दावा किया और राजेश तलवार के नौकरों को संदिग्ध माना। इसके बाद पुलिस ने कहा कि राजेश तलवार ने कथित तौर पर आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखा और गुस्से में दोनो की हत्या कर दी।

arushi hemraj murder case and seven faults in cbi investigation

मामला सीबीआई के पास पहुंचा। 26 नवंबर 2013 को सीबीआई की अदालत ने तलवार दंपति को दोषी करार दिया। तलवार दंपति सभी आरोपों से इनकार करते हैं। अब पत्रकार अविरुक सेन ने ‘आरुषि’ नाम की किताब लिखी है। अपनी किताब में अविरुक सेन ने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और तलवार दंपति का बचाव किया है। पेश है किताब के मुताबिक़, सीबीआई की सात ‘ग़लतियां’।

arushi hemraj murder case and seven faults in cbi investigation

1. किताब के मुताबिक़, सीबीआई ने घटनास्थल पर जो नमूने इकट्ठा किए और प्रयोगशाला भेजे, उनके साथ कथित तौर पर छेड़खानी की गई। कई नमूनों को बिना अदालत की इजाज़त के सील कवर से निकाला गया और तस्वीरें ली गईं। किताब का दावा है कि घटनास्थल की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ हुई। सेन कहते हैं कि हैदराबाद की सेंटर फ़ॉर डीएनए फ़िंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नॉस्टिक लैब की रिपोर्ट में कहा गया था कि हेमराज का खून तलवार दंपति के घर से कुछ दूर स्थित कृष्णा के बिस्तर पर मिला, लेकिन जांचकर्ताओं ने इसका संज्ञान नहीं लिया।

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आरुषि-हेमराज - फोटो : फाइल फोटो

2. अविरुक के मुताबिक़, अगर रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा गया होता तो तलवार दंपति के उस कथन को मज़बूती मिलती कि घर में कोई बाहरी व्यक्ति दाखिल हुआ। अविरुक कहते हैं कि सीबीआई के एक अफ़सर धनकर ने 2008 में प्रयोगशाला को पत्र लिखकर कहा कि हेमराज का तकिया और उसका खोल, जिस पर खून लगा था, वो आरुषि के कमरे से मिले थे। उधर सीबीआई ने इसके उलट सुप्रीम कोर्ट के सामने, इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने, अपनी क्लोज़र रिपोर्ट में भी ये कहा कि ये सामान हेमराज के कमरे से मिला। लेकिन मुक़दमे के दौरान सीबीआई की अदालत में दिए गए बयान को नज़रअंदाज़ करते हुए सीबीआई अफ़सर धनकर की ‘ग़लत’ चिट्ठी पर भरोसा दिखाया गया। अविरुक कहते हैं कि सीबीआई अफ़सर की चिट्ठी से उस कहानी को बल मिला कि हेमराज अपने बिस्तर और तकिए के साथ आरुषि के कमरे में मौजूद थे, आरुषि ने उन्हें अपने कमरे में आने दिया। इससे तलवार दंपति की उस दलील को धक्का लगा कि आरुषि की हत्या में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ था और ऑनर किलिंग की दलील को मज़बूती मिली।

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arushi talwar

3. किताब के मुताबिक़, सीबीआई का कहना था कि आरुषि की हत्या राजेश तलवार ने एक गॉल्फ़ स्टिक से की जिसे कथित तौर पर बाद में अच्छे से साफ़ किया गया, लेकिन मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने एक दूसरी गोल्फ़ स्टिक को पेश किया। अविरुक सवाल उठाते हैं कि अभियोजन पक्ष मुकदमे के दौरान दो गोल्फ़ स्टिक कैसे पेश कर सकता है। अविरुक के अनुसार, सरकारी वकील की ओर से दलील दी गई कि आरुषि का गला स्कैल्पल या डेंटिस्ट द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली छुरी से काटा गया। लेकिन सीबीआई ने कभी भी तलवार दंपति के यहां से ऐसे स्कैल्पल को बरामद नहीं किया। साथ ही किसी भी स्कैल्पल को फ़ॉरेंसिक प्रयोगशाला में नहीं भेजा गया। सेन के अनुसार, इस बात की फ़ॉरेंसिक जांच की कोशिश भी नहीं की गई कि स्कैल्पल से हत्या की भी जा सकती है या नहीं। सेन के मुताबिक़, सीबीआई अदालत में जांच अधिकारी की बात को प्रमुखता दी गई जिसे फ़ॉरेंसिक जांच के बारे में नहीं पता था।

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