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दुर्लभ किस्म के सॉफ्ट टिशू से पीड़ित थे अरुण जेटली, 100 कैंसर मरीजों में एक को होता है

Sun, 25 Aug 2019 08:36 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 25 Aug 2019 08:36 AM IST
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Arun Jaitley was suffering from a rare type of cancer soft tissue
अरुण जेटली (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
पृर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली किडनी के साथ साथ सॉफ्ट टिशू सर्कोमा (कैंसर) से भी पीड़ित थे। यह दुर्लभ कैंसर कुल कैंसर के मामलों का एक प्रतिशत होता है। इन सॉफ्ट टिशू यानी कोमल उत्तकों में हमारी मांसपेशियां, त्वचा, लिगामेंट, वसा, रक्तवाहिका, आदि शामिल होते हैं। इनका काम हमारी शरीर के विभिन्न अंगों और संरचनाओं को घेर कर सहारा देना होता है। 
Arun Jaitley was suffering from a rare type of cancer soft tissue
फाइल फोटो
ये हड्डियों व दांत के विभिन्न हिस्सों को बनाने वाले सख्त उत्तकों से अलग होते हैं। ये हमेशा पानी या द्रव्य से सराबोर रहते हैं और लचीले होते हैं।
जेटली को हुआ यह कैंसर बेहद जटिल माना जाता है। इसकी वजह है कि इसके पहले तो इसके लक्षण ही नजर नहीं आते। सॉफ्ट टिशु बेहद लचीले होते हैं, ऐसे में इनमें उपजा कैंसर ट्यूमर आकार में बड़ा होता जाता है लेकिन पीड़ित को पता भी नहीं चल पाता। शुरुआत में यह ट्यूमर दर्द रहित होता है। जब यह इतना बड़ा हो जाता है कि इसे छूकर महसूस किया जा सके, तब इसकी सामान्यत: पहचान हो पाती है। 
 
Arun Jaitley was suffering from a rare type of cancer soft tissue
फाइल फोटो
शरीर के जिस हिस्से में यह कैंसर ट्यूमर बढ़ता है, वहां सूजन और हल्का दर्द होता है। आसपास के अंगों की कार्यक्षमता को भी यह प्रभावित करने लगता है। आमतौर पर यह जोड़ों, पेट और मांसपेशियों में पनपता है। अरुण जेटली के बायें पैर में इसका असर था।
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वजहें : अज्ञात, केवल अनुमान

Arun Jaitley was suffering from a rare type of cancer soft tissue
फाइल फोटो
सॉफ्ट टिशू सर्कोमा की पुख्ता वजह आज तक मालूम नहीं हो सकी हैं। केवल अध्ययनों के आधार पर अनुमान लगाए जाते हैं -
- लकड़ी व प्लास्टिक पर किए जाने वाले लेप में मौजूद क्लोरोफिनॉल, विनाइल क्लोराइड, आदि कैमिकल से इसकेे होने की आशंकाएं जताई गई हैं।
- रेडिएशन की अधिक मात्रा से सॉफ्ट टिशू को होने वाला नुकसान भी इसकी वजह हो सकता है।
- कुछ खास जीन और डीएनए कोशिकाओं में गड़बड़ भी सॉफ्ट टिशू सर्कोमा की वजह माने गए हैं।
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Arun Jaitley was suffering from a rare type of cancer soft tissue
फाइल फोटो
और इलाज
अपने इलाज के लिए जेटली इसी वर्ष अमेरिका जा चुके थे। यहां उनकी सर्जरी की गई थी। लेकिन इस दुर्लभ किस्म के कैंसर के इलाज की सफलता ट्यूमर के आकार और कैंसर की स्टेज पर निर्भर होती है। इसमें सर्जरी, रेडिएशन थैरेपी और कीमो थैरेपी शामिल होती हैं।
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