मिलिए, पत्थरों के जादूगर से जिसने कबाड़ और पत्थरों से इतना खूबसूरत वंडरलैंड बनाया कि जो भी देखता बस देखता रह जाता। 18 साल तक उस जगह को दुनिया से छिपाए रखा, देखिए तस्वीरों में। आज ये जगह वर्ल्ड फेमस है।
हम बात कर रहे हैं, स्वर्गीय नेकचंद की। आज इनका जन्मदिन है। इन्होंने दुनिया के लिए चंडीगढ़ में एक खूबसूरत दुनिया बनाई 'रॉक गार्डन'। यह उनकी 18 साल की तपस्या का परिणाम है, जो केवल कूड़े और कबाड़ से बनी है। जो दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है और जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। स्व. नेक चंद ने रॉक गार्डन का निर्माण प्रशासन की अनुमित के बिना चोरी छिपे शुरू किया था।
1956 में गार्डन के निर्माण के लिए उन्होंने साइकिल पर पत्थर और कंधों पर पानी ढोया। शहर से कबाड़ चुन-चुनकर लाते और जंगल में इकट्ठा करते। अधिकारियों को इसके बारे में 1975 में भनक लगी। तब तक चार एकड़ में कलाकृतियां बन चुकी थीं। नियमों के खिलाफ मानते हुए इसे गिराने की तैयारी की जाने लगी तो लोग नेक चंद के समर्थन में आ गए तो लेंडस्केप एडवायजरी कमेटी ने अनुमति दे दी।
तत्कालीन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. एमएस रंधावा ने इसे रॉक गार्डन का नाम दिया। बता दें कि चंडीगढ़ में पहली सड़क का निर्माण नेकचंद सैनी ने ही किया था। पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट में नौकरी करते हुए उन्होंने सबसे पहले प्रेस बिल्डिंग वाली सेक्टर-17 और 18 की डिवाइडिंग रोड बनाई। उसके बाद एक-एक कर बाकी सड़कें बनीं। उनकी बनाई सड़क पर पांच साल पैचवर्क करने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
कैपिटल कांप्लेक्स प्रोजेक्ट के रि. एसडीओ बहादुर सिंह बताते हैं कि नेकचंद ने रॉक गार्डन का निर्माण एक छोटी-सी कुटिया से किया था। नेकचंद साइकिल पर पत्थरों की तलाश में निकलते थे। सकेतड़ी, नेपली और कसौली से वह अलग-अलग साइज के पत्थर चुन कर लाते। फिर किसी को मुंह तो किसी को सूंड बना देते। शुरुआत में पहले झोपड़ी बनाई। वह गोबर से लिपाई करते। रॉक गार्डन के फेज-2 में रखी गईं कलाकृतियां। इन्हें नेकचंद ने खुद बनाया था।