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श्राप की वजह से आज भी इस मंदिर में प्रवेश नहीं करती महिलाएं, जानें इसके पीछे की मान्यताएं

Fri, 28 Sep 2018 05:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिहोवा (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिहोवा (हरियाणा) Updated Fri, 28 Sep 2018 05:11 PM IST
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Womens do not enter the Kartikeya temple of Pehova in haryana
कार्तिकेय

21वीं सदी में जहां महिलाएं अंतरिक्ष में पहुंचकर अपना परचम लहरा रही हैं, वहीं हरियाणा के पिहोवा में बने सरस्वती तीर्थ पर स्थित एक मन्दिर में महिलाओं के प्रवेश पर ही पाबंदी है। हालांकि महिलाएं खुद भी इस मंदिर में जाना नहीं चाहती हैं। इसका कारण इस मंदिर के देवता का श्राप माना जाता है। इस श्राप का डर और खौफ आज भी महिलाओं के जेहन में इस कदर है कि वो मंदिर में जाना ही नहीं चाहती हैं। महिलाओं में यह डर है कि मन्दिर के देवता के दर्शन करने पर उन्हें सात जन्म तक विधवा रहना पड़ेगा। मंदिर के बाहर फ्लैक्स बोर्ड पर हिन्दी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में साफ तौर पर महिलाओं के लिए यह चेतावनी भी लिखी हुई है। 

Womens do not enter the Kartikeya temple of Pehova in haryana
कार्तिकेय मंदिर

यूं तो पूरे भारत में भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी के अनेक मन्दिर हैं। विशेषकर दक्षिण भारत में स्वामी कार्तिकेय जी के अनेक मन्दिर हैं। जहां स्वामी कार्तिकेय जी (मुरुगन) की पूजा की जाती है। लेकिन पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर स्वामी कार्तिकेय जी का एक ऐसा मन्दिर है। जिसमें महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है। इसका कारण स्वामी कार्तिकेय जी का स्त्री को दिया गया श्राप है।

Womens do not enter the Kartikeya temple of Pehova in haryana
मंदिर

श्राप का डर आज भी महिलाओं के जेहन में है। मंदिर के महंत राज तिलक गिरी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार जब भगवान शंकर अपने पुत्र कार्तिकेय का राजतिलक करने का विचार करने लगे, तब माता पार्वती जी अपने छोटे पुत्र गणेश का राजतिलक करवाने के लिए हठ करने लगी। तभी ब्रहमा, विष्णु व शंकर जी सहित सभी देवी-देवता एकत्रित हुए और सभा में यह निर्णय लिया गया कि दोनो भाइयों में जो समस्त पृथ्वी का चक्कर लगा कर पहले पहुंचेगा, वही राजतिलक का अधिकारी होगा। 

भगवान कार्तिकेय अपने प्रिय वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए चल पड़े और जब गणेश जी अपने वाहन चूहे पर बैठकर चक्कर लगाने के लिए जाने लगे, तभी माता पार्वती गणेश जी से कहने लगी कि वत्स तुम यहीं पर समस्त देवगणों की परिक्रमा कर डालो, क्योंकि त्रिलोकीनाथ यहीं विराजमान हैं। माता पार्वती के समझाने पर गणेश जी ने तीन चक्कर लगा कर भगवान शंकर को प्रणाम किया और कहा कि मैंने सम्पूर्ण जगत की परिक्रमा कर ली है। 

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Womens do not enter the Kartikeya temple of Pehova in haryana
मंदिर

भगवान शंकर ने गणेश का राजतिलक कर दिया और शुभ-अशुभ कार्यो में पूजा का अधिकार दे दिया। उधर मार्ग में नारद जी ने कार्तिकेय जी को सारा वृतांत बता दिया। कार्तिकेय जी अतिशीघ्र परिक्रमा पूरी करके सभा स्थल पर आ पहुचें और माता पार्वती जी से सारा हाल जान कर बोले, हे माता आपने मेरे साथ छल किया है। बड़ा होने के नाते  राजतिलक पर मेरा ही अधिकार था। 

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Womens do not enter the Kartikeya temple of Pehova in haryana
मंदिर

तुम्हारे दूध से मेरी खाल व मांस बना हुआ है, मैं इसको अभी उतार देता हूं। अत्यन्त क्रोधित होकर कार्तिकेय जी ने अपनी खाल व मांस उतारकर माता के चरणों में रख दिया और समस्त नारी जाति को श्राप दिया कि मेरे इस स्वरूप का जो स्त्री दर्शन करेगी, वह सात जन्म तक विधवा रहेगी, तभी देवताओं ने उनके शारीरिक शांति के लिए तेल व सिन्दूर का अभिषेक कराया, जिससे उनका क्रोध शांत हुआ और शंकर जी व अन्य देवताओं ने कार्तिकेय जी को समस्त देव सेना का सेनापति बना दिया। 

हरियाणा के पिहोवा में बना कार्तिकेय जी का यह मंदिर अति प्राचीन है। मन्दिर में दिन रात अखण्ड ज्योति जल रही है। मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण जी ने इसे युधिष्ठिर द्वारा प्रज्जवलित करवाई थी। महाराभारत युद्ध में मृत्यु को प्राप्त कर चुके युधिष्ठिर के वंशज का सरस्वती तट पर यहीं कर्म, पिण्ड आदि सम्पन्न हुआ था और भगवान कार्तिकेय पर तेल का अभिषेक कराया गया था। अभी भी यह प्रथा जारी है। तीर्थ यात्री कार्तिकेय पर तेल चढाने से कदापि नहीं चूकते।

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