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Valentines Day: अजब प्रेम की 4 गजब कहानियां पढ़ें और आज अपनों से कहें...इश्क मुबारक

Thu, 14 Feb 2019 10:45 AM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: shubham Updated Thu, 14 Feb 2019 10:45 AM IST
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Valentines Day 2019: Romantic Love Story to Enjoy the Day
valentine day
प्यार वो अहसास है, जो हो गया तो ईश्वर की इबादत और मिल गया तो जिंदगी जन्नत। ऐसे ही अजब प्रेम की चार गजब कहानियां पढ़ें और आज वैलेंटाइन डे पर अपनों से कहें, इश्क मुबारक...
Valentines Day 2019: Romantic Love Story to Enjoy the Day
वैलेंटाइन कपल
राजेंद्र पाल, तीन पीढ़ियों से निभा रहे प्यार का वादा
आज वेलेंटाइन डे हैं। इस खास मौके पर आज हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं पंचकूला की ऐसी फैमिली से जिनकी तीन पीढ़ियों ने प्यार को एक नई परिभाषा दी। इन्होंने न सिर्फ प्यार किया, बल्कि अपना वायदा निभाते हुए अपना प्यारा सा संसार भी बसाया। यह परिवार है सेक्टर- 4 में रहने वाले राजेंद्र पाल भारद्वाज का। अमर उजाला से खास मुलाकात में भारद्वाज ने कहा कि जनरेशन चाहे कोई भी उनके प्यार करने का अंदाज बदल सकता है, लेकिन प्यार के लिए दिल के जज्बात नहीं। उन्होंने कहा कि प्यार भगवान का दिया हुआ खूबसूरत तोहफा है। जिसे उन्होंने नहीं बल्कि उनके परिवार की हर जनरेशन ने सलाम किया है। राजेंद्र पाल के अनुसार वे लुधियाना के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी राजदुलारी के साथ उनकी पहली मुलाकात ट्रेन में हुई जब वे मोगा जा रहे थे और उनकी पत्नी लुधियाना कॉलेज में पढ़ने के लिए। उनकी बुआ की लड़की ने राजदुलारी से उनकी पहली बार बातचीत करवाई थी। 1964 से 1966 तक दो साल के लव अफेयर के बाद एक ही जाति के होने के कारण घर वाले भी मान गए और दोनों की शादी हो गई। भारद्वाज ने बताया कि शादी के बंधन में बंधे 53 साल हो गए हैं। वे आज तक कभी भी अपनी पत्नी से अलग नहीं हुए। जहां भी जाना हो दोनों साथ ही जाते हैं। दोनों ने पढ़ाई भी एक दूसरे के साथ ही की हैं। इत्तेफाक से दोनों के नाम भी एक अक्षर से है। डेट ऑफ बर्थ और रिटायरमेंट डेट भी एक ही है। उन्होंने बताया कि आज वेलेंटाइन डे पर वे दोनों कहीं बाहर घूमने जाएंगे।
Valentines Day 2019: Romantic Love Story to Enjoy the Day
वैलेंटाइन कपल
प्यार में पड़ा था कुंडली का पंगा, उसमें भी पास
कांग्रेसी पार्षद गुरबख्श रावत और बीरेंद्र सिंह रावत का प्यार परवान चढ़ा तो कुंडली का भी पंगा हुआ। बीरेंद्र रावत के पिता ने कहा कि कुंडली मिलेगी तो शादी होगी। इसके बाद कुंडली मिलाई गई तो दोनों के गुण मिल गए और फिर शादी हुई। बस अड्डे में आंखें चार हुईं और कॉफी हाउस में प्यार पक्का हो गया। दोनों की बस अड्डे पर पहचान हुई और फिर चल पड़ी प्यार की गाड़ी। गुरबख्श रावत और उनके पति बीरेंद्र रावत बताते हैं कि वर्ष 1999 में एक दूसरे की मुलाकात सेक्टर 17 के बस अड्डे पर हुई थी। उस समय गुरबख्श रावत बीएससी फाइनल ईयर में सेक्टर 11 के गवर्नमेंट कॉलज फॉर गर्ल्स में पढ़ाई कर रही थीं। गुरबख्श रावत का कहना है कि उन दिनों कंप्यूटर कोर्स करना चाहती थी। एक दोस्त ने कहा कि मुझे पता है कि एक मेरे दोस्त हैं जो कई संस्थानों में कंप्यूटर कोर्स करवाते हैं। फिर सेक्टर 17 में बस अड्डे पर मुलाकात हुई। गुरबख्श रावत ने बताया कि उसके बाद मेरे दोस्त ने उनसे मिलवाया। वे बीरेंद्र रावत ही थे। उन्होंने मुझे अच्छी तरह से कोर्स करवाया। काफी केयर की तो इसके बाद मेरी बात और मुलाकात दोनों बढ़ती गईं। बीरेंद्र रावत ने बताया कि बस अड्डे पर पहली मुलाकात के बाद सेक्टर 15 में अपने स्कूटर पर बैठाकर कॉफी पी और बातें हुईं। दोस्ती परवान चढ़ती गई और साथ ही प्यार भी। हम दोनों पत्नी-पत्नी तो हैं ही दोस्ती भी पुरानी है। बीरेंद्र रावत का कहना है कि जब दोस्ती हो गई तो कॉलेज के सामने ही लाला लाजपत राय भवन में हर रोज मुलाकात होती। उस समय मोबाइल फोन तो थे नहीं इसलिए एसटीडी पर बात होती थी। हम बात करने के लिए एक दिन पहले ही रूटीन तय कर लेते थे। दोस्ती के डेढ़ वर्ष बाद शादी की। रोज गार्डन में भी हम दोनों काफी देर तक बैठकर बातें करते थे। रोज गार्डन के गुलाब और लाला लाजपत राय भवन दोनों ही हम दोनों के प्यार के गवाह हैं।
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Valentines Day 2019: Romantic Love Story to Enjoy the Day
वैलेंटाइन कपल
हैंडबॉल कोर्ट से शुरू हुआ प्यार का बंधन शादी तक पहुंचा
स्पोर्ट्स ग्राउंउ में मिले और एक दूसरे को दिल दे बैठे। इसके बाद शुरू हुई लव स्टोरी। इस प्यार को सचिन और स्नेहलता ने विवाह के बंधन तक पहुंचाया। आज यह दोनों हैंडबॉल के इंटरनेशनल के खिलाड़ी हैं और युवाओं को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। सचिन और स्नेहलता के लिए प्यार का सबसे बड़ा दिन वेेलेंटाइन डे है। दोनों को इस दिन का बेसब्री से रहता है। कई महीने पहले इस दिन को मनाने केलिए प्लाइंनिंग भी करते हैं। वेलेंटाइन वाले दिन यह दोनों एक दूसरे को तोहफा भी देने से नही चूकते। सचिन कहते हैं कि यह दिन हर कोई मना सकता है। युवा ही नही शादीशुदा स्त्री पुरुष भी इसे मना सकते हैं। मेरी पत्नी मेरे लिए सबकुछ है। यह दिन हम दोनों के लिए खास महत्व रखता है। विवाह से पहले भी हम इस दिन को मनाते थे और आज भी इस दिन का यादगार बनाने के लिए कुछ न कुछ करते हैं। इस दिन की सुबह फू ल एक दूसरे को फूल देने से होती है। इसके बाद मैं अपनी पत्नी को तोहफा देता हूं। वह भी मुझे तोहफा देती है। शाम तक सैर सपाटे पर निकल जाते हैं। इसकेबाद रात को हम एक दूसरे की पंसदीदा चीजें बनाते हैं। टेबल पर बैठकर वेलेंटाइन डे का लुत्फ उठाते हैं।

हैंडबॉल कोर्ट से शुरू हुई प्रेम कहानी
सचिन और स्नेहलता जब शुरुआती दिनों में हैंडबॉल खेलते थे तो हैंडबॉल कोर्ट पर एक दूसरे को देखते थे। दोनों की रुचि हैंडबॉल में थी। हैंडबॉल कोर्ट पर एक दिन बातचीत हु़ई और यह सिलसिला आगे बढ़ा। इसके बाद मुलाकातें हुई और बात प्यार तक पहुंच गई। दोनों ने इस प्यार का आगे बढ़ाया और शादी कर ली।
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Valentines Day 2019: Romantic Love Story to Enjoy the Day
वैलेंटाइन कपल
बस में सीट देकर जीता था दिल, परिवार नहीं माना तो भागकर की शादी
चंडीगढ़ के मेयर राजेश कालिया और उनकी पत्नी रेनू की प्यार की कहानी भी बड़ी रोचक है। राजेश कालिया ने बस में सीट देकर अपनी महबूबा का दिल जीता था। मेयर बताते हैं कि हम एक दूसरे का हमेशा काफी ख्याल रखते हैं। वर्ष 1992 में प्यार हुआ और 1996 में शादी हुई। जब घर वाले नहीं माने तो हम दोनों भागकर नैना देवी पहुंच गए और शादी कर ली। रेनू का कहना है कि वे डड्डूमाजरा कालोनी के पास कम्युनिटी सेंटर में अपनी मां के साथ रहती थीं। बस अड्डा के सामने कम्युनिटी सेंटर था। तब वह दसवीं में सेक्टर 24 के स्कूल में पढ़ाई करती थीं। राजेश कालिया एक वकील के पास मुंशी का काम करते थे। दोनों ही बस में सफर करते थे। शिष्टाचार के नाते राजेश कालिया रेनू की मां को प्रणाम करते और भारी भीड़ होने के कारण उनके लिए सीट छोड़ देते। कई बार रेनू अकेली होतीं तो उनके लिए भी अपनी सीट छोड़ देते। बस यहीं से प्रेम कहानी आगे बढ़ी। रेनू की मां ने अपनी बेटी से कहा कि राजेश कालिया से किसी भी हालत में शादी के लिए हां नहीं करूंगी। चाहे जो भी हो जाए। इसका कारण था कालिया का स्वभाव। साथ ही रेनू ब्राह्मण परिवार से संबंधित थीं, लेकिन दोनों ने ठान लिया और फिर 12 फरवरी, 1996 को दोनों ने भागकर नैना देवी में शादी कर ली। रेनू और कालिया की तीन बेटियां हैं।
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