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सावन 2019: देखिए 67 साल पुराना भगवान भोलेनाथ का मंदिर, जहां स्थापित है नर्मदेश्वर शिवलिंग
Wed, 17 Jul 2019 12:09 PM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 17 Jul 2019 12:09 PM IST
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शिव मंदिर
- फोटो : फाइल फोटो
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सावन का महीना शुरू हो चुका है। इस मौके पर भगवान भोलेनाथ के 67 साल पुराने इस मंदिर में आइए, जहां नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है, तस्वीरों में देखिए।
शिव मंदिर
- फोटो : फाइल फोटो
अमर उजाला शिव मंदिरों और शिवालयों से परिचय कराने जा रहा है। इसकी पहली कड़ी में सेक्टर 8 के प्राचीन शिव मंदिर का परिचय कराते हैं। यहां बने शिव मंदिर का इतिहास चंडीगढ़ के बनने से पहले का है। जहां मंदिर है, वह जगह पहले कालीबड़ गांव के नाम से जानी जाती थी। चंडीगढ़ के बसने पर गांव के लोगों को दूसरी जगह पर बसा दिया गया, लेकिन मंदिर उसी जगह पर विद्यमान है। वर्ष 1952 से यह मंदिर है। इसमें 1960 से कीर्तन होना शुरू हुआ। पहले छोटे से कच्चे कमरे में शिवलिंग था। अब आलीशान मंदिर है।
शिव मंदिर
- फोटो : फाइल फोटो
मंदिर का संचालन श्री सनातन धर्म सभा सेक्टर-8 की ओर से किया जाता है। यहां सावन में भक्तों की काफी भीड़ लगती है। मंदिर कमेटी के प्रधान एचएस लक्की बताते हैं कि चंडीगढ़ के बारे में कोई अता- पता नहीं था, तब से मंदिर अस्तित्व में है। आज मंदिर में 10 कमरे हैं, जिसमें यात्रियों और संतों के ठहरने की व्यवस्था है। मंदिर में देवी देवताओं की लीलाओं को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यह काम दिल्ली के कलाकारों ने करीब 21 वर्ष पहले किया था। मंदिर का भवन एयर कंडीशनर है। मंदिर का पुनर्निर्माण 1971 में महाशिवरात्रि पर्व पर किया गया था।
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शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के आंगन में लगा त्रिवेणी पेड़ भी बहुत प्राचीन है। एचएस लक्की बताते हैं कि मंदिर में हर रोज वीवीआईपी पूजा के लिए आते हैं। इसमें मंत्री, विधायक, जज और बड़े-बड़े उद्योगपति पूजा करने आते हैं। मंदिर में नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है। सावन के सभी सोमवार को भक्तों को खीर और मालपुए का प्रसाद बांटा जाता है।
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शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के प्रमुख पुजारी अयोध्या प्रसाद शास्त्री का कहना है कि मंदिर के साथ गुरुद्वारा भी है। गुरुद्वारा या मंदिर में जो भी बड़ा आयोजन होता है, उसमें एक-दूसरे समुदाय के लोग साथ-साथ रहते हैं और सहयोग करते हैं। मंदिर में एक बड़ा और एक छोटा हॉल है, जहां पर सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मंदिर में उठाला रस्म क्रिया का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।