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पत्नी ने माथा चूम, बेटे-बेटियों ने सैल्यूट करके सूबेदार को दी अंतिम विदाई, 4 महीने बाद थी रिटायरमेंट
Wed, 17 Jul 2019 11:13 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 17 Jul 2019 11:13 AM IST
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जवान का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
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पत्नी ने माथा चूमकर और बेटे व बेटियों ने सैल्यूट करके सूबेदार बलविंदर सिंह को अंतिम विदाई दी। चार महीने बाद वे रिटायर होने वाले थे। तस्वीरों में देखिए अंतिम संस्कार...
जवान का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के जींद जिले में रामबीर कॉलोनी निवासी असम राइफल में तैनात सूबेदार बलविंदर सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर दो बजे उनके घर पहुंचा। बलविंदर सिंह सोलन स्थित एक बिल्डिंग के गिर जाने से उसके मलबे में दब गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई। यहां स्वर्ग आश्रम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बलविंदर सिंह को उनके नौ वर्षीय बेटे जतिन ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
जवान का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
48 वर्षीय बलविंदर सिंह असम राइफल में हेडक्लर्क का काम देख रहे थे। रविवार शाम को वह सोलन के एक रेस्टोरेंट में अपने साथियों के साथ बैठकर चाय पी रहे थे कि बिल्डिंग गिर गई और सभी जवान इसके नीचे दब गए। इनमें से 13 जवानों की मौत हो गई। मरने वालों में बलविंदर सिंह भी शामिल थे। हिसार से सेना के नायक सूबेदार डिंपल कुमार ने उनकी पत्नी मोनिका को तिरंगा भेंट किया।
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जवान का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
बलविंदर सिंह अपने पीछे पत्नी मोनिका, बड़ी बेटी रोहिणी, छोटी बेटी कुसुम तथा एक बेटे जतिन को छोड़ गए हैं। रोहिणी 12वीं कक्षा में और कुसुम 8वीं कक्षा में तथा जतिन पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। असम राइफल में तैनात हवलदार रामभज ने बताया कि बलविंदर सिंह बहुत ही बहादुर अधिकारी थे। चार महीने बाद ही रिटायर होने वाले थे। बलविंदर तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई परविंदर लुधियाना में दुकान चलाते हैं, जबकि छोटे भाई मुकेश मजदूरी का काम करते हैं।
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जवान का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
बेटे को सेना में भेजने का था सपना
बलविंदर के भाई परविंदर ने बताया कि वह मूल रूप से बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं। चार साल पहले ही बलविंदर ने जींद में मकान खरीदा था और यहां रहने लगे थे। वह अपनी बड़ी बेटी रोहिणी की दो-तीन वर्ष में शादी करने की बात कहते थे। बलविंदर का सपना था कि बेटे जतिन को भी सेना में भेजें। वह बेटे को सेना में भर्ती के लिए कोचिंग लेने को कहीं बाहर भेजने वाले थे।
बलविंदर के भाई परविंदर ने बताया कि वह मूल रूप से बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं। चार साल पहले ही बलविंदर ने जींद में मकान खरीदा था और यहां रहने लगे थे। वह अपनी बड़ी बेटी रोहिणी की दो-तीन वर्ष में शादी करने की बात कहते थे। बलविंदर का सपना था कि बेटे जतिन को भी सेना में भेजें। वह बेटे को सेना में भर्ती के लिए कोचिंग लेने को कहीं बाहर भेजने वाले थे।