25 अगस्त को
राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद की गई हिंसा और उपद्रव के लिए पूरी प्लानिंग की गई थी और कई टीमें बनाकर एरिया सौंपे गए थे।
डेरा मुखी को सजा सुनाने के बाद पंजाब में हिंसा फैलाने के लिए आठ सदस्यों की टीम बनाई गई थी जिसे ‘ए’ टीम का नाम दिया गया था। इन सदस्यों को बाकायदा एरिया दिए गए थे कि अदालत का फैसला आने के बाद किस-किस जगह को निशाना बनाना है। इस ‘ए’ टीम की पहली बैठक 17 अगस्त की देर रात को सिरसा में हुई थी, जिसमें हिंसा फैलाने की पूरी प्लानिंग तैयार की गई थी। यह खुलासा संगरूर पुलिस द्वारा पकड़े गए संगरूर ‘ए’ टीम के इंचार्ज दुनी चंद ने किया है।
एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि डेरे के सात ब्रह्मचारी राकेश कुमार के भाई सतपाल टोनी पिछले लंबे समय से सिरसा में रहता है और डेरा मुखी का विश्वासपात्र है। उसी ने पंजाब में हिंसा फैलाने के लिए आठ सदस्यों का चुनाव किया था। इनमें दुनी चंद वासी शेरपुर, मानसा से मेजर सिंह ख्याला, बठिंडा से बलविंदर सिंह बंदी, बाघापुराना से पृथ्वी चंद, बठिंडा से गुरदेव सिंह, कोटकपूरा से महिंदरपाल सिंह, कोटभाई बठिंडा से गुरदास सिंह और गुरजीत सिंह मोगा शामिल थे।
इसे ‘ए’ टीम का नाम दिया गया। इस टीम का इंचार्ज रवि कुमार निवासी मुक्तसर को लगाया गया था। टीम की मुख्य भूमिका पंजाब में हिंसा फैलाना था। पूछताछ के दौरान दुनी चंद ने बताया कि टीम की पहली बैठक 17 अगस्त को सिरसा में रवि कुमार ने रात करीब दो बजे की थी, जो करीब तीस से चालीस मिनट तक चली थी। इसमें तय किया गया था कि यदि फैसला डेरा प्रमुख के खिलाफ आया तो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा फैलाने के लिए कहा गया।
इन आठ सदस्यों की टीम को आगे दो टीमों में बांटा गया एक टीम जिसमें दुनी चंद, मेजर सिंह, बलजिंदर सिंह, पिरथी चंद, गुरदेव सिंह को बठिंडा, पटियाला, मानसा, बरनाला और संगरूर का इंचार्ज बनाया गया और महिंदरपाल सिंह, गुरदास सिंह, गुरजीत सिंह को बाकी पंजाब का हिस्सा दिया गया। सभी सदस्य बैठक के बाद अपने घरों को चले गए। घर पहुंचने के बाद इन सदस्यों ने फोन के जरिए और अन्य तरीकों से अपने समर्थकों से संपर्क करना शुरू कर दिया।