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पिता के आश्रित होने को लेकर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बेटे ध्यान से पढ़ लें

Wed, 31 May 2017 09:36 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 31 May 2017 09:36 AM IST
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punjab haryana highcourt decision on Father's dependency on son
पिता पुत्र के रिश्ते - फोटो : demo photo
पिता के आश्रित होने को लेकर उठे प्रश्न का जवाब देते हुए हाईकोर्ट ने बड़ा ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो बेटों के लिए बहुत जरूरी है।
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पिता पुत्र के रिश्ते
यदि पिता समृद्ध है और उसके पास आय का साधन है, तब भी वह बेटे पर आश्रित की श्रेणी में आता है। आश्रित के मायने केवल आर्थिक आधार पर यानी पैसे से नहीं लगाए जा सकते बल्कि शारीरिक स्थिति के पैमाने को भी देखना अनिवार्य है, जिसके चलते पिता बेटे पर आश्रित होता है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया है।
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पिता पुत्र के रिश्ते
हरियाणा के जींद के रहने वाले मनोज कुमार व सुभाष ने एडवोकेट दीपक सोनक के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए पिता की बीमारी के इलाज के लिए खर्च की गई राशि की रिइंबर्समेंट न करने के हरियाणा सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। याची ने बताया कि उनके पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। मनोज के पिता के इलाज में 705936 और सुभाष के पिता के इलाज में 177718 रुपये खर्च हुए थे।
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पिता पुत्र के रिश्ते
याची ने कहा कि वे पुलिस कर्मचारी हैं और इस राशि के भुगतान के लिए हरियाणा सरकार को बिल सौंपते हुए रिइंबर्समेंट की अपील की थी। हरियाणा सरकार ने यह कहते हुए रिइंबर्समेंट देने से इनकार कर दिया था कि दोनों के पिता की भूमि है और वे किसान हैं। वे न्यूनतम 3500 रुपये मासिक से अधिक कमाते हैं, जिसके चलते मेडिकल रिइंबर्समेंट का लाभ उन्हें नहीं दिया जा सकता है।
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court - फोटो : Demo Pic
हाईकोर्ट ने याचिकाओं में दी गई दलील पर गौर करने के बाद और विभिन्न जजमेंट का निरीक्षण करने के बाद यह माना कि पिता भले ही समृद्धि हो व उसकी अपनी संपत्ति व आय के साधन हों फिर भी वह अपने बेटे पर आश्रित की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने कहा कि आश्रित के मायने को केवल पैसे यानी आर्थिक तौर पर नहीं देखा जा सकता। जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है वह शारीरिक तौर पर निर्भर होना आरंभ हो जाता है।
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