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Chandigarh News: पीजीआई में 1000 से ज्यादा आंखें रोशनी के इंतजार में
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चंडीगढ़। किसी के लिए आंखें दान करना जीवन के बाद का एक फैसला है, लेकिन किसी दूसरे के लिए यही फैसला जिंदगीभर की रोशनी बन सकता है। पीजीआई में इस समय एक हजार से अधिक मरीज कॉर्निया ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा में हैं जबकि संस्थान को हर साल करीब 400-500 डोनेटेड कॉर्निया ही मिल पाते हैं। मंगलवार को 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के आगाज के मौके पर सामने आया यह आंकड़ा नेत्रदान की जरूरत को साफ तौर पर रेखांकित करता है।
पीजीआई के एडवांस्ड आई सेंटर में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए 25 अगस्त से 8 सितंबर तक अभियान चलाया जा रहा है। निदेशक डॉ. विवेक लाल और नेत्र रोग विभाग की प्रमुख प्रो. उषा सिंह ने गुब्बारे छोड़कर पखवाड़े की शुरुआत की। अभियान के दौरान लोगों को नेत्रदान के फायदे बताने के साथ इससे जुड़े भ्रम और आशंकाएं दूर की जाएंगी।
हर मरीज को पूरे कॉर्निया की जरूरत नहीं
कॉर्निया ट्रांसप्लांट का मतलब हमेशा पूरी आंख या पूरा कॉर्निया बदलना नहीं होता। मरीज की बीमारी और कॉर्निया की किस परत को नुकसान पहुंचा है, इसके आधार पर अलग-अलग तकनीक अपनाई जाती हैं। आधुनिक लैमेलर ट्रांसप्लांट में कई बार केवल खराब परत को हटाकर डोनर की स्वस्थ परत लगाई जाती है। इससे सर्जरी कम आक्रामक हो सकती है और रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज होती है।
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ये तकनीक राह कर रही आसान
डीएसएईके – कॉर्निया की अंदरूनी परत का प्रत्यारोपण
डीएमईके – कॉर्निया की बेहद पतली अंदरूनी परत का प्रत्यारोपण
डीएएलके – कॉर्निया की आगे की खराब परतों का प्रत्यारोपण
बॉक्स
3 सितंबर को निकलेगी जागरूकता वॉक
नेत्रदान का संदेश शहर के लोगों तक पहुंचाने के लिए 3 सितंबर को शाम पांच बजे रॉक गार्डन से सुखना लेक तक अवेयरनेस वॉकाथॉन आयोजित की जाएगी। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता व्याख्यान, पोस्टर मेकिंग और निबंध प्रतियोगिताएं भी होंगी। 5 सितंबर को एडवांस्ड आई सेंटर में अभियान का समापन होगा।
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पीजीआई के एडवांस्ड आई सेंटर में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए 25 अगस्त से 8 सितंबर तक अभियान चलाया जा रहा है। निदेशक डॉ. विवेक लाल और नेत्र रोग विभाग की प्रमुख प्रो. उषा सिंह ने गुब्बारे छोड़कर पखवाड़े की शुरुआत की। अभियान के दौरान लोगों को नेत्रदान के फायदे बताने के साथ इससे जुड़े भ्रम और आशंकाएं दूर की जाएंगी।
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हर मरीज को पूरे कॉर्निया की जरूरत नहीं
कॉर्निया ट्रांसप्लांट का मतलब हमेशा पूरी आंख या पूरा कॉर्निया बदलना नहीं होता। मरीज की बीमारी और कॉर्निया की किस परत को नुकसान पहुंचा है, इसके आधार पर अलग-अलग तकनीक अपनाई जाती हैं। आधुनिक लैमेलर ट्रांसप्लांट में कई बार केवल खराब परत को हटाकर डोनर की स्वस्थ परत लगाई जाती है। इससे सर्जरी कम आक्रामक हो सकती है और रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज होती है।
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ये तकनीक राह कर रही आसान
डीएसएईके – कॉर्निया की अंदरूनी परत का प्रत्यारोपण
डीएमईके – कॉर्निया की बेहद पतली अंदरूनी परत का प्रत्यारोपण
डीएएलके – कॉर्निया की आगे की खराब परतों का प्रत्यारोपण
बॉक्स
3 सितंबर को निकलेगी जागरूकता वॉक
नेत्रदान का संदेश शहर के लोगों तक पहुंचाने के लिए 3 सितंबर को शाम पांच बजे रॉक गार्डन से सुखना लेक तक अवेयरनेस वॉकाथॉन आयोजित की जाएगी। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता व्याख्यान, पोस्टर मेकिंग और निबंध प्रतियोगिताएं भी होंगी। 5 सितंबर को एडवांस्ड आई सेंटर में अभियान का समापन होगा।