प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में चंडीगढ़ के संदीप कुमार का नाम यूं ही नहीं लिया। उनकी तपस्या व त्याग से पीएम खुद भी प्रभावित हैं। संदीप की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि आपके पेन की रिफिल खत्म हो जाती है और आप उसे फेंक देते हैं, उसी खाली पेन में रिफिल डालकर संदीप गरीब विद्यार्थियों तक पहुंचाते हैं।
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संदीप ने तैयार की लाइब्रेरी।
आपके एक फोन पर वह किताबें व स्टेशनरी का सामान मुफ्त में घर तक पहुंचाते हैं। यह काम आसान नहीं है लेकिन जोश व जज्बा संदीप में कूट-कूटकर भरा हुआ है। लगभग तीन साल से संदीप कुमार 20 हजार विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ रहे हैं। उनके इस कार्य से प्रभावित होकर 200 स्वयंसेवक उनसे जुड़े हैं जो उनकी मदद कर रहे हैं। यह स्वयंसेवक अधिकारी, शिक्षक, वकील आदि पेशों से जुड़े हैं।
ऐसे शुरू हुआ सफर
संदीप कुमार मूलतः हरियाणा के भिवानी के रहने वाले हैं। वहीं से इंटर तक की पढ़ाई की। उसके बाद जेबीटी का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान हरियाणा के कई सरकारी स्कूलों में पहुंचे तो उनका मन दुखी होने लगा। क्योंकि सरकार की योजनाएं उन गरीब बच्चों तक नहीं पहुंच रही थी। किसी के पास किताबें नहीं थी तो किसी के पास पेंसिल व पेन।
वहीं से संदीप का मन बदलना शुरू हो गया। शाम को घर पहुंचते थे तो वह परेशान होते थे। उसी के साथ ठान लिया कि अब वह समाजसेवा की ओर कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने जेबीटी का प्रशिक्षण पूरा किया और जनवरी 2017 से गरीब बच्चों की मदद के लिए जुट गए। सेक्टर- 39 में अपने भाई के साथ वह रहते हैं। धीरे-धीरे लोगों से किताबें मुफ्त में लेना शुरू किया और कुछ स्कूलों में जाकर कैंप लगाना शुरू कर दिया। उनके कार्य से प्रभावित होकर लोग जुड़ते चले गए। उन्होंने ट्राईसिटी ( चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली) के अधिकांश कॉलेजों व स्कूलों में कैंप लगाए।
वैन को लाइब्रेरी के रूप में प्रयोग किया और हर स्कूल तक गए। अब तक वह 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को किताबें, स्टेशनरी आदि पहुंचा चुके हैं। यह विद्यार्थी कक्षा एक से लेकर परस्नातक तक के हैं। डॉक्टरी की पढ़ाई में जुटे लुधियाना के कुछ विद्यार्थियों को भी किताबें पहुंचाई। क्योंकि यह किताबें बाजार से महंगी मिल रही थी जो उन्हें मुफ्त में पहुंचाई गई।