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10 रुपये का सिक्का लेने से कोई मना करे तो यहां करें शिकायत, जेल हो सकती है

Thu, 30 Nov 2017 05:05 PM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 30 Nov 2017 05:05 PM IST
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people refusing to take ten rupee coin in chandigarh, do complaint to rbi
10 रुपये के सिक्के
10 का सिक्का लेने से लोग अभी भी इंकार कर रहे हैं, जबकि ऐसा होने पर ​शिकायत की जा सकती है और इंकार करने वाले को जेल जाना पड़ सकता है। यकीं नहीं तो ये पढ़िए।
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10 रुपये का सिक्का
कभी सिक्के 10 से 15 फीसदी ब्लैक में खरीदने पड़ते थे, अब सिक्के दुकानदारों के गुल्लक में भरे पडे़ हैं। हालात यह है कि दुकानदार सिक्के लेने से घबरा रहे हैं। यहां तक कि मंदिरों के दानपात्र भी नोटों से कम सिक्कों से ज्यादा भर रहे हैं। पहले ऐसा होता था कि चंडीगढ़ मार्केट एसोसिएशन और व्यापार मंडल बैंकों से रेजगारी दिलवाने के लिए बाजारों में सिक्कों का कैंप लगाते थे। लेकिन अब कोई भी मार्केट एसोसिएशन ऐसा नहीं कर रही है।
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10 रुपये का सिक्का
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के चेयरमैन चरणजीव सिंह ने बताया कि सिक्कों की भरमार होने से रेजगारी का कारोबार करने वाले बेरोजगार हो गए हैं। पंजाब व हरियाणा से सिक्को का काम करने वाले प्रतिदिन चंडीगढ़ के बैंकों में आते थे, जहां से लाखों का सिक्का लेकर संबंधित राज्यों के जिलों में ब्लैक पर बेचते थे। पंजाब में सबसे ज्यादा जालंधर और लुधियाना में रेजगारी का कारोबार होता था। नोटबंदी के बाद से सिक्के की मांग निरंतर गिरती रही।

 
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Rs 10 Coins - फोटो : PTI
सेक्टर-18 की राधा कृष्णा मंदिर के अध्यक्ष सुनील चोपड़ा का कहना है कि नोटबंदी के बाद से मंदिर की गुल्लकों में नोट कम और सिक्कों की संख्या ज्यादा बढ़ी है। सिक्कों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत बढ़ गई है। पहले दुकानदार खुद मंदिर की गुल्लक खुलने का इंतजार करते थे। लेकिन अब कोई व्यापारी रेजगारी लेने के लिए नहीं आते हैं। परचून का कारोबार करने वाले भी सिक्के नहीं लेते हैं। अब बैंक जाना पड़ता है, सिक्के बदलवाने के लिए।

 
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दस रुपये के सिक्के
ग्रेन मार्केट एसोसिएशन के चेयरमैन सतप्रकाश अग्रवाल कहते हैं कि आरबीआई के निर्देशानुसार, 10 रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा है। इसको लेने से इनकार करने पर राजद्रोह का मामला बनता है और जो ऐसा करता है उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (1) के तहत मामला दर्ज हो सकता है क्योंकि मुद्रा पर भारत सरकार वचन देती है। इसको लेने से इनकार करना राजद्रोह है। इसके बारे में उन्होंने आरबीआई की वेबसाइट पर पढ़ा था।
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