आई कैंप 'जानलेवा', ऑपरेशन के बाद गई 15 मरीजों की रोशनी
पानीपत के समालखां में गत 11 मार्च को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 13 लोगों की रोशनी चली गई थी। पीजीआई रेफर करने और लंबे इलाज के बावजूद इन मरीजों की आंखें ठीक नहीं हो पाई थी।
आई कैंप 'जानलेवा', ऑपरेशन के बाद गई 15 मरीजों की रोशनी
सभी मरीज 27 नवंबर को संस्था में पहुंचे, तो संस्था के सदस्यों ने प्राइवेट टैक्सियां मंगवाई और उन्हें ये कहकर पीजीआई ले गए कि उनका इलाज चंडीगढ़ में बढ़िया तरीके से किया जाएगा। किसी भी मरीज को यह नहीं बताया गया कि उनकी आंखों का ऑपरेशन खराब हो चुका है। पीजीआई के डाक्टरों ने मरीजों को बताया कि इंफेक्शन होने से उनकी आंखें खराब हो चुकी है।
आई कैंप 'जानलेवा', ऑपरेशन के बाद गई 15 मरीजों की रोशनी
पीड़ितों के परिजनों ने बताया कि पट्टी खोलने के बाद सभी मरीजों को डाक्टरों व स्टाफ ने दवा दे दी और कहा कि एक-दो दिन में आंखों की रोशनी आ जाएगी, लेकिन सुधार नहीं हुआ तो चिकित्सकों से मोबाइल पर संपर्क करना शुरू किया। शाम को संस्था के सदस्यों ने सभी मरीजों को यह कहकर बुलाया कि चंडीगढ़ से आंखों के बड़े डाक्टर आए हैं, वे उनकी जांच करेंगे। इस पर मरीजों ने उन्हें 27 नवंबर की सुबह आने की बात कही।
आई कैंप 'जानलेवा', ऑपरेशन के बाद गई 15 मरीजों की रोशनी
संस्था की ओर से आयोजित कैंप में खुड्डा निवासी शांति देवी, छोटा खुड्डा की शांति देवी, संतोषवती, देवेंद्र कौर, शांति, शारदा, अयोध्या देवी सहित 15 मरीजों का मोतियांबिंद का ऑपरेशन किया गया था। इन मरीजों को 25 नवंबर को आंखों की पट्टी खोलने और चश्मे लगवाने के लिए बुलवाया गया। आंखों की पट्टी खोली गई तो उन्हें जिस आंख का ऑपरेशन हुआ था, उससे कुछ दिखाई नहीं दिया।
आई कैंप 'जानलेवा', ऑपरेशन के बाद गई 15 मरीजों की रोशनी
मरीजों ने जब बताया कि उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है तो कैंप आयोजकों और ऑपरेशन करने वाली चिकित्सकों की टीम में हड़कंप मच गया। दो दिन बाद सभी मरीजों को आनन-फानन में गुपचुप तरीके से प्राइवेट टैक्सियों में बिठाया और पीजीआई ले जाकर भर्ती करवा दिया। परिजनों की शिकायत पर स्वास्थ्य मंत्री विज ने सीएमओ को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।