संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर देश भर में विवाद हो रहा है, जबकि बवाल की असली जड़ चित्तौड़गढ़ है। जानिए क्या है असली इतिहास?
190 करोड़ की लागत से भंसाली ने दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अभिनीत मूवी 'पद्मावती' बनाई। मूवी एक दिसंबर को रिलीज की जानी थी, लेकिन करणी सेना विरोध में आ गई। करणी सेना का कहना है कि फिल्म में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच रोमांस को दिखाया गया है, जो इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। इस बात को लेकर विवाद बढ़ता चला गया।
नतीजा, रिलीज होने से पहले ही कई राज्यों में पद्मावती पर बैन लग गया। इसलिए भंसाली ने फिल्म की रिलीज को टाल दिया है। भंसाली ने दर्शकों से अपील की है कि वे पहले फिल्म देख लें, उसके बाद ही निर्णय लें कि उसमें कुछ गलत है या नहीं। लेकिन बात नहीं बनी, परिणामस्वरूप मूवी का नाम बदला गया। कुछ और महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए, घूमर गाने में भी बड़ा चेंज किया गया।
तमाम तरह के विवादों के बाद मूवी को पद्मावत नाम से 25 जनवरी को रिलीज किया गया। हालांकि करणी सेना का विरोध जारी है, लोग भी लगातार विरोध कर रहे हैं। मूवी की रिलीज को लेकर तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई। बावजूद इसके मूवी को देश भर में रिलीज किया गया। संजय लीला भंसाली ने खिलजी और पद्मावती को केंद्र में रखकर मूवी बनाई। हम बता रहे हैं आपको कि असली कहानी और चित्तौड़गढ़ का इतिहासा क्या है...
रानी पद्मावती को पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता था। वे चित्तौड़गढ़ की रानी और राजा रतनसिंह की पत्नी थीं। इन्हें बेहद खूबसूरत माना जाता था। कहा जाता है कि खिलजी वंश का शासक अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को पाना चाहता था। रानी को जब ये पता चला तो उन्होंने कई दूसरी राजपूत महिलाओं के साथ जौहर कर लिया। उनके अनुसार दुश्मनों के हाथ लगने से बेहतर जौहर करना ही था।