हाइजैक हुए प्लेन से 360 जिंदगियां बचाने वाली बहादुर बेटी नीरजा पर बनीं फिल्म को बेस्ट फिल्म के अवॉर्ड से नवाजा गया। जानिए कैसे लड़ी थी आतंकियों से।
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
ये कहानी है उस बहादुर बेटी की, जिसकी मौत पर पाकिस्तान ने भी आंसू बहाए थे। भारत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान अशोक चक्र दिया था, पाक ने तमगा-ए-इन्सानियत। भारत ने उनके नाम पर डाक टिकट भी जारी किया था। मोगा के गांव घलकलां के देशभगत पार्क में उसका एकमात्र स्टेच्यू स्थापित किया गया है। वहीं पर 16 फुट लंबा जहाज बनाया गया है और उस बहादुर बेटी की शहादत को सारी दुनिया सलाम करती है।
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भारत की बहादुर बेटी नीरजा भनोट
- फोटो : फाइल फोटो
आप समझ ही गए होंगे, बात हो रही है शहीद नीरजा भनोट की। नीरजा भनोट को उसके जन्मदिन से दो दिन पहले हाइजेक हुए प्लेन में आतंकियों ने गोली मार दी थी। दम तोड़ने से पहले इस बेटी ने 360 लोगों की जानें बचाई थी। 17 घंटे तक वह आतंकियों से जूझती रही। Pan Am 73 एयरलाइंस का प्लेन आज ही के दिन, 5 सितंबर 1986 को पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट पर हथियार बंद 4 आतंकवादियों हाईजैक कर लिया था।
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5 सितंबर को हाईजेक हुआ प्लेन और नीरजा भनोट
आतंकवादी प्लेन को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे। लेकिन प्लेन में मौजूद फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट ने ऐसा नहीं होने दिया। उसने हिम्मत दिखाते हुए लोगों को बचा लिया, पर अपनी जान गंवा दी। चंडीगढ़ में 7 सितंबर 1964 को जन्मी नीरजा का बचपन मुम्बई में बीता। स्कूली शिक्षा बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से हुई और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली।
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नीरजा भनोट की कहानी
- फोटो : File Photo
नीरजा को बचपन से ही प्लेन में बैठने और आकाश में उड़ने की इच्छा थी। नीरजा भनोट की शादी 1985 में हो गई थी, लेकिन दहेज के दबाव के कारण उनके रिश्तों में खटास आ गई। वे शादी के दो महीने बाद ही मुम्बई लौट आई थीं। 1986 में मॉडल के रूप में उन्होंने कई TV और प्रिंट ऐड करना शुरू कर दिए थे। शौक को पूरा करने के मकसद से नीरजा ने बाद में एयरलाइंस ज्वाइन कर ली।