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नाथूराम गोडसे ने बापू को क्यों मारा था, इस शख्स को खुद बताई थी वजह, जानिए
Tue, 06 Feb 2018 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 06 Feb 2018 09:28 AM IST
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नाथूराम गोडसे
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर हम आपको बात रहे हैं, वो वजह जिस कारण बापू की हत्या की गई और इसका खुलासा खुद नाथूराम गोडसे ने किया था।
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नाथूराम गोडसे
बापू की हत्या के बाद नाथूराम गोडसे जेल में मिलने महात्मा गांधी के पुत्र देवदास गांधी गए थे। उनसे गोडसे ने कहा था कि तुम्हारे पिताजी की मृत्यु का मुझे बहुत दुख है। महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को 15 नवंबर 1949 को एक अन्य षडयंत्रकारी नारायण आप्टे को फांसी दी गई थी। नाथूराम गोडसे का शव सरकार ने परिजन को नहीं दिया था।
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महात्मा गांधी
जेल के अधिकारियों ने घग्घर नदी के किनारे पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। जेल में नाथूराम और आप्टे को बी कैटेगरी में रखा गया था। नाथूराम कॉफी पीने और जासूसी किताबें पढ़ने का शौकीन था। वो छुरी-कांटे से खाना पसंद करता था। हालांकि, जेल में उसे ये सुविधाएं नहीं मिली। 15 नवंबर 1949 को गोडसे को फांसी दिए जाने से एक दिन पहले परिजन उससे मिलने अंबाला जेल गए थे।
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mahatma gandhi
गोडसे की बेटी, भतीजी और गोपाल गोडसे की पुत्री हिमानी सावरकर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह फांसी से एक दिन पहले अपनी मां के साथ उनसे मिलने अंबाला जेल गई थी। उस समय वह ढाई साल की थी। गिरफ़्तार होने के बाद गोडसे ने गांधी के पुत्र देवदास गांधी (राजमोहन गांधी के पिता) को तब पहचान लिया था जब वे गोडसे से मिलने थाने पहुंचे थे।
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mahatma gandhi
इस मुलाकात का जिक्र नाथूराम के भाई और सह-अभियुक्त गोपाल गोडसे ने अपनी किताब गांधी वध क्यों, में किया है। गोपल गोडसे ने अपनी किताब में लिखा है, देवदास शायद इस उम्मीद में आए होंगे कि उन्हें कोई वीभत्स चेहरे वाला, गांधी के खून का प्यासा कातिल नजर आएगा, लेकिन नाथूराम सहज और सौम्य थे. उनका आत्मविश्वास बना हुआ था. देवदास ने जैसा सोचा होगा, उससे एकदम उलट।
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