अब अपनी खैर मनाएं दुश्मन, पाकिस्तान और चीन खबरदार, कोई हरकत हुई तो मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। भारतीय वायुसेना को एक ऐसा शिकारी मिल गया है, जो पलक झपकते ही दुश्मन का खात्मा कर देगा। तस्वीरें देखते ही रह जाएंगे।
देश में चार चिनूक हेलीकाप्टर आ गए हैं, अगले साल मार्च तक इसकी आखिरी खेप भी आ जाएगी। इसके बाद इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में विश्व के 15 सबसे खतरनाक हैवी लिफ्ट सीएच-47 एफ (आई) हैलीकाप्टर मौजूद होंगे। इससे एयरफोर्स का प्रहार और अधिक घातक हो जाएगा। अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा चिनूक के भारत आने के बाद एयरफोर्स अपनी आगामी रणनीति में भी जुट गई है।
उधर, चिनूक के आते ही एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने चीन और पाकिस्तान को ‘खबरदार’ रहने की नसीहत दे डाली। धनोआ पहले ही साफ कर चुके हैं कि चिनूक की यूनिटें भारत के उतरी व पूर्वी क्षेत्र में तैनात रहेंगी। इसी के तहत पहली यूनिट चंडीगढ़ स्थित 12 विंग एयरफोर्स स्टेशन में तैनात की गई है, ताकि पाकिस्तान की ओर से नापाक हरकतों का जवाब देने के लिए एयरफोर्स पूरी तरह तैयार रहे।
युद्ध की स्थिति के दौरान चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन एक अहम भूमिका में रहता है, जबकि चिनूक की दूसरी यूनिट असम स्थित एयरफोर्स की दिनजान एयरफील्ड में तैनात रहेगी। यह एयरफील्ड द्वितीय विश्वयुद्ध (1945) के समय से है और यहां से चीन बॉर्डर की दूरी भी बहुत ज्यादा नहीं है। इस एयरफील्ड पर चिनूक तैनात करके इंडियन एयरफोर्स चीन को भी खबरदार करेगा। इस तरह इस वक्त चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के मौजूदा हालातों में एयरफोर्स की ये रणनीति कारगर साबित होगी।
दुश्मन के अचानक मूव पर मददगार बनेगा चिनूक
एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने माना कि इस वक्त देश मल्टीपल सिक्योरिटी चैलेंज से गुजर रहा है। लिहाजा प्रहार को और घातक व तकनीक को और अपग्रेड करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार चिनूक हाई अल्टीच्यूड एरिया में विभिन्न सैन्य अभियानों में दिन हो या रात मददगार साबित होगा। पाकिस्तान और चीन बॉर्डर पर दुश्मन यदि हाई अल्टीच्यूड एरिया में अचानक हमारे क्षेत्र में घुसपैठ करता है, तो ये चिनूक तुरंत हमारी सैन्य शक्ति को संबंधित क्षेत्र तक पहुंचाने मे सक्षम है। कारगिल युद्ध के समय देश ऐसी स्थिति से गुजर चुका है, जब पाकिस्तान सेना एलओसी पार कर भारत के बंकरों पर काबिज हो गई थी।