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हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट: वसीयत लिखने वाला व्यक्ति उसका गवाह भी हो सकता है, कानून में ऐसी कोई रोक नहीं है
Wed, 26 Aug 2026 09:38 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 26 Aug 2026 09:38 AM IST
सार
अमरजीत कौर बनाम हरभजन कौर उर्फ भजन कौर के बीच था। निसंतान हरभजन कौर लुधियाना के मकान की मालिक थीं। उन्होंने पहले अपनी बहन अमरजीत कौर के पक्ष में वसीयत की थी। बाद में वर्ष 2008 में हरभजन कौर ने वह वसीयत रद्द कर दी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वसीयत लिखने वाला व्यक्ति उसी वसीयत का गवाह भी हो सकता है। कानून में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है।
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हालांकि, इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि उसने केवल दस्तावेज तैयार करने के लिए हस्ताक्षर नहीं किए थे, बल्कि वसीयतकर्ता की इच्छा के अनुसार गवाह के तौर पर भी हस्ताक्षर किए थे।
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अदालत ने यह टिप्पणी लुधियाना के बस्ती जोधेवाल में मकान के कब्जे से जुड़े एक विवाद में की। हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पंजीकृत वसीयत के आधार पर संपत्ति पर दावा स्वीकार किया गया था। यह मामला अमरजीत कौर बनाम हरभजन कौर उर्फ भजन कौर के बीच था। निसंतान हरभजन कौर लुधियाना के मकान की मालिक थीं। उन्होंने पहले अपनी बहन अमरजीत कौर के पक्ष में वसीयत की थी। बाद में वर्ष 2008 में हरभजन कौर ने वह वसीयत रद्द कर दी।
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संपत्ति विवाद का घटनाक्रम
रद्दीकरण के बाद अमरजीत कौर ने बिक्री समझौते के आधार पर मकान पर दावा किया। उनका दीवानी मुकदमा वर्ष 2009 में खारिज हो गया। जनवरी 2010 में अमरजीत कौर पर मकान पर कब्जा करने का आरोप लगा। हरभजन कौर की मृत्यु के बाद गुरविंदर कौर को कानूनी प्रतिनिधि बनाया गया। हरभजन कौर ने 15 मार्च 2013 को गुरविंदर कौर के पक्ष में पंजीकृत वसीयत की थी। न्यायमूर्ति विकास सूरी ने कहा कि कानून में लेखक और गवाह दोनों होने पर रोक नहीं है।