पिछले 8 माह से पंजाब शिक्षा विभाग के समक्ष धरने पर बैठे शिक्षा प्रोवाइडरों पर पुलिस का कहर बरपा। पुलिस ने धरनास्थल से घसीट-घसीट कर उन्हें गाड़ियों में भरा। तस्वीरें।
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मोहाली में टीचर्स और पुलिस में विवाद
- फोटो : अमर उजाला
जिक्रयोग है कि पिछले आठ महीनों से शिक्षा प्रोवाइडर अपनी मांगों को लेकर यहां क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ रहे थे। मंगलवार को भी चार महिला शिक्षा प्रोवाइडर मनजीत कौर, दविंदर कौर, रविंदर कौर और सुखविंदर कौर भूख हड़ताल बैठीं थीं। हालांकि सोमवार को ही पुलिस ने धरनास्थल खाली कराने के संकेत दे दिए थे। इसी के चलते सोमवार रात को प्रदर्शनकारियों के तंबू उखाड़ दिए गए थे, लेकिन अगले ही दिन काफी संख्या में यहां शिक्षा प्रोवाइडर लामबद्ध हो गए।
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सूचना मिलते ही एसपी गुरसेवक सिंह, एसपी जीएस ग्रेवाल भारी पुलिस बल और वाटर कैनन गाड़ी सहित पूरी तैयारी के साथ धरनास्थल पर पहुंचे। एसपी ने शिक्षा प्रोवाइडरों के नेता कुलदीप सिंह बढूवाल, शमशेर सिंह मोहाली, जोन प्रधान जोगा सिंह और मनिंद्र सिंह राणा से बातचीत कर धरनास्थल से उठने की चेतावनी दी थी, धरनास्थल पर बड़ी संख्या में मौजूद महिला शिक्षा प्रोवाइडरों ने पुलिस की इस चेतावनी को खारिज कर दिया और धरनास्थल खाली करने से साफ इंकार कर दिया।
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आखिरकार मौके पर मौजूद पुलिस के उच्चाधिकारियों के आदेश पर महिला पुलिस ने सभी शिक्षा प्रोवाइडरों को जबरन उठाया और इन प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग गाड़ियों में भरा गया, यही हाल पुरुष शिक्षा प्रोवाइडरों और इनके नेताओं का हुआ। धरनास्थल से उठाने के बाद प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में ठूंस कर अलग-अलग जगहों पर भेजा गया। शिक्षा प्रोवाइडर शिवानी और मनजीत कौर ने बताया कि उन्हें पीजीआई से आगे सियोंक गांव के निकट एक रेस्ट हाऊस में रखा गया है।
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शिक्षा प्रोवाइडरों के नेता शमशेर सिंह मोहाली ने बताया कि उनका संघर्ष जारी रहेगा। पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें उठाकर उनके अधिकारों को छीनने का काम किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर मुबारकपुर, डेरा बस्सी और सियोंक जैसे अलग-अलग इलाकों में जाकर रखा है। डीजीएसई पंजाब के शिक्षा प्रोवाइडरों की सेवाओं को समाप्त किए जाने के विरोध में यह धरना पिछले कई माह से जारी था।