पूर्व फौजी रामकिशन के सुसाइड पर सियासत चरम पर है, लेकिन इस सियासत से दूर उस सैनिक की पत्नी की मांग सुनिए।
जान देने वाले पूर्व सैनिक की पत्नी की मांग, मिले शहीद का दर्जा
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
फौज की करीब 35 साल की नौकरी के दौरान 1971 में पाकिस्तान युद्ध लड़ा। रिटायरमेंट के बाद लोगों के हक-हकूक की लड़ाई के लिए सरपंच बने और अब वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) आंदोलन के लिए जान दी। कुछ इस तरह के उतार-चढ़ावों से भरा रहा है दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे ओआरओपी आंदोलन के दौरान खुदकुशी करने वाले रामकिशन ग्रेवाल (65) का जीवन।
जान देने वाले पूर्व सैनिक की पत्नी की मांग, मिले शहीद का दर्जा
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
मंगलवार रात रामकिशन ग्रेवाल की मौत की खबर के बाद परिजन व ग्रामीण स्तब्ध हैं। बुधवार को दिनभर गांव में रामकिशन के जुझारूपन और जज्बे की चर्चा होती रही। शव गांव लाए जाने पर वीरवार को अंत्येष्टि की जाएगी। पति की मौत से गमजदा रामकिशन की पत्नी किताबो देवी ने कहा कि उसके पति ने ओआरओपी आंदोलन व सैनिकों के लिए जान दी है।
जान देने वाले पूर्व सैनिक की पत्नी की मांग, मिले शहीद का दर्जा
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
किताबो देवी ने कहा कि अब हम केवल इतना चाहते हैं कि उन्हें शहीद का दर्जा मिले और उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ हो। किताबो ने बताया कि वे 31 अक्तूबर को खुश मूड में दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं। आज उनकी मौत की खबर आई।
जान देने वाले पूर्व सैनिक की पत्नी की मांग, मिले शहीद का दर्जा
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
रामकिशन के बेटे कुलवंत ने बताया कि उनके पिता ने ओआरओपी आंदोलन व सैनिकों के लिए अपनी जान दी है। उनके पिता की मौत के बाद हो रही पॉलिटिक्स से कोई मतलब नहीं है। हम तो केवल यह चाहते हैं कि उनके पिता को शहीद का दर्जा मिले। गांव के ही रिटायर्ड सूबेदार उम्मेद सिंह ने भी रामकिशन की सक्रियता की तारीफ की।