करीब 28 साल पहले 1991 में फतेहवीर सिंह के दादा रोही सिंह ने खेत में सिंचाई के लिए करीब 150 फुट गहरा बोर खुदवाकर ट्यूबवेल लगवाया था। जल स्तर गिरने के कारण करीब छह साल पहले बोर ने काम करना बंद कर दिया। अब इसी बोरवेल में रोही सिंह के मासूम पोते की जिंदगी फंसी हुई है।
इसके बाद ज्यादा गहराई का दूसरा ट्यूबवेल लगवा लिया लेकिन पुराने बोर को स्थायी तौर पर बंद नहीं किया। इसी लापरवाही का नतीजा है कि मात्र दो साल का फतेहवीर सिंह बोर में गिर गया और 48 घंटे बीत जाने के बाद भी उसे बाहर निकालने की जद्दोजहद जारी है। शनिवार को मौके पर पहुंचे कैबिनेट मंत्री विजयइंदर सिंगला ने कहा कि यदि किसी चीज का प्रयोग नहीं हो रहा है और उससे जोखिम का अंदेशा हो तो उसे हटाने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है।
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Borewell
- फोटो : अमर उजाला
सरकार की ओर से इस संबंध में कानून बनाए गए हैं। समय की मांग को देखते हुए यदि जरूरत पड़ी तो नए सिरे से कानून बनाने पर विचार हो सकता है। सिंगला ने कहा कि पहली बार इतनी गहराई में बच्चे के गिरने की घटना हुई है जिसके कारण संघर्ष ज्यादा हो रहा है। डीसी घनश्याम थौरी ने कहा कि खाली बोर को बंद करने को लेकर कानून बने हुए हैं और जिला स्तर पर इस कानून का पालन करने की हिदायतें जारी की जाती हैं।
संगरूर में भी इस तरह की हिदायत पहले से जारी की हुई हैं और लोगों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। मासूम फतेहवीर के जल्द सकुशल निकलने की कामना के लिए अरदास और प्रार्थना करने का दौर लगातार जारी है। घटनास्थल पर लोग और फतेहवीर के परिजन लगातार अरदास करके ऑपरेशन के सफलतापूर्वक पूरे होने और अपने बच्चे की लंबी आयु की दुआ मांग रहे हैं। फतेहवीर की मां गगनदीप कौर, पिता सुखविंदर सिंह और दादा रोही सिंह के अलावा अन्य रिश्तेदार अरदास में शामिल हो रहे हैं।
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लोग कर रहे सलामती की अरदास
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पिता और दादा ऑपरेशन पर नजर रखे हुए हैं और बार-बार सीसीटीवी के पास जाकर बच्चे की मूवमेंट का पता कर रहे हैं। कांग्रेस की हलका प्रभारी दामन बाजवा, उनके पति हरमन बाजवा, अकाली दल के युवा नेता विन्नरजीत सिंह गोल्डी भी ऑपरेशन में जुटी टीम से सहयोग कर रहे हैं। पिछले दो दिन से ये नेता घटनास्थल पर जमे हुए हैं। जरूरी सामान मुहैया करवाया जा रहा है। एसडीएम मनजीत कौर भी कई बार भावुक होती दिखाई दीं और वह पूरा समय मौके पर ही मौजूद रहीं।