जम्मू कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र गुरेज सेक्टर में तैनात हवलदार कुलदीप सिंह का आज उनके पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
जम्मू में मिली शहादत, तिंरगे में लिपटकर घर लौटा बेटा, संस्कार
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शहीद परिवार को तिरंगा भेंट करते हुए सैन्य अधिकारी।
- फोटो : amarujala
13 सिख यूनिट के हवलदार कुलदीप सिंह (37) की ड्यूटी के दौरान अपनी राइफल की सफाई करते अचानक राइफल से गोली चलने से मौत हो गई। शनिवार को गुरदासपुर जिले में पड़ते उनके सीमावर्ती पैतृक गांव मलूकचक्क में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले तिरंगे में लिपटी शहीद की पार्थिव देह जब गांव पहुंची तो माता बलवीर कौर व पत्नी जोगिंदर कौर की चीखें पत्थरों का कलेजा छलनी कर रही थी।
जम्मू में मिली शहादत, तिंरगे में लिपटकर घर लौटा बेटा, संस्कार
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शहीद पिता को सैल्यूट करते हुए बेटा मनप्रीत व बेटी रछमीत।
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सेना में अफसर बन करूंगा पापा का सपना साकार
मैं भी सेना में अफसर बन कर अपने पापा का सपना साकार करूंगा। जब भी पापा का फोन आता था तो वह हमेशा मुझे यह ही कहते थे कि बेटा मेहनत से पढ़ाई करो, मैं तुम्हें सेना में अफसर बनना देखना चाहता हूं। यह बात शहीद कुलदीप सिंह के 11 वर्षीय बेटे मनप्रीत सिंह ने नम आंखों से कही।
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सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
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तिब्बड़ी कैंट से आई 4 राजपूत यूनिट की सैन्य टुकड़ी ने शस्त्र उलटे कर बैंड की मातमी धुन के साथ शहीद को सलामी दी। शहीद के 11 वर्षीय बेटे मनप्रीत व 13 वर्षीय बेटी रछमीत ने शहीद पिता की चिता को मुखाग्नि दी। शहीद के पिता प्यारा सिंह ने बताया कि 23 मार्च को उनके बेटे ने फोन करके सारे परिवार को होली की बधाई दी थी, लेकिन उसके दो घंटे बाद ही उनकी शहादत की आई खबर ने परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा दिया।
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हवलदार कुलदीप सिंह
- फोटो : file
शहीद की पार्थिव देह के साथ उनकी यूनिट के सूबेदार जसबीर सिंह ने बताया कि उनकी यूनिट सात महीने पहले ही तिब्बड़ी कैंट से जम्मू कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र गुरेज सेक्टर के कंजलवान जगह पर तैनात हुई थी। 23 मार्च को हवलदार कुलदीप सिंह ड्यूटी पर तैनात था तथा अपनी राइफल की सफाई कर रहा था कि एक गोली चैंबर में फंस गई। राइफल कॉक (खोलते) करते ही वह गोली उनके सीने को भेदते हुए निकल गई।